अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए सोशल मीडिया विश्व में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है, हर साल सोशल मीडिया पर लाखों करोड़ों लोग इस मंच से जुड़ते हैं, मगर जहाँ ये मंच लोगों को कनेक्ट करने में अहम् भूमिका निभाने के लिए रोल अदा कर रहा है, वहीँ विश्व में पिछले सालों में इसका दुरूपयोग करने के मामलों में बड़ी तेज़ी से वृद्धि हुई है.

विश्व में सोशल मीडिया के प्रसार के साथ घृणा और हिंसा के प्रसार में भी उसका इस्तेमाल होने लगा है, कई देश इस दुरूपयोग से चिंतित हैं और इसके खिलाफ तत्परता से संज्ञान ले रहे हैं, दुनिया के दूसरे देशों की तरह जर्मनी भी सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वालों से तंग है, और इसके खिलाफ कड़े क़दम उठाना शुरू भी कर दिए हैं.

इसी के चलते जर्मनी की धुर दक्षिणपंथी महिला सांसद को नए साल की पूर्व संध्या पर सोशल मीडिया पर मुस्लिम विरोधी भड़काऊ टिप्पणी करने पर पुलिस जांच का सामना करना पड़ रहा है.

  • ऐसे नफरती गैंग के लोगों को काबू करने के लिए जर्मनी में पहली जनवरी से एक नया कानून लागू किया गया, इस कानून के मुताबिक सोशल मीडिया वेबसाइटों ने अगर रिपोर्ट करने के बाद भी 24 घंटे के भीतर हेट स्पीच वाली सामग्री को नहीं हटाया तो उन पर पांच करोड़ यूरो (यानि 380 करोड़ रुपए) का जुर्माना लग सकता है :-
    http://www.bbc.com/news/technology-42510868

इसी क़ानून के डर के चलते ट्विटर ने झटपट कई मुस्लिम विरोधी और प्रवासी विरोधी ट्वीट हटा दिए थे.

  • जर्मनी की इस पहल के बाद फ़्रांस के राष्ट्रपति इमानुअल मेक्रोन ने भी सोशल मीडिया के दुरूपयोग और ऑनलाइन फेक न्यूज़ के खिलाफ कड़े क़दम उठाये हैं :-
    http://en.rfi.fr/…/20180104-new-media-law-france-target-fak…
  • ब्रिटैन ने भी फेसबुक के साथ मिलकर सोशल मीडिया पर पांव फैला रहे नफरती गैंग्स और उनके घृणित एजेंडों पर लगाम लगाने की पहल की है और Britain First जैसे दक्षिणपंथी संगठन और उसके पदाधिकारियों के अकाउंट ससपेंड कर दिए हैं :-
    https://www.aljazeera.com/…/anti-islam-britain-group-banned…
  • 13 मार्च 2018 को अल-जज़ीरा ने ही खबर दी थी UN फैक्ट फाइंडिंग टीम ने कहा है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानो के क़त्ले आम में फेसबुक ने बड़ा रोल अदा किया है :- https://www.aljazeera.com/…/facebook-role-rohingya-genocide…
  • श्रीलंका में अतिवादी बौद्धों और मुसलमानो के बीच हुए दंगों में भी इसी फेसबुक ने रोल अदा किया था, श्रीलंकन पुलिस ने बताया था कि सोशल मीडिया ने इस हिंसा को बढ़ने में अहम् रोल अदा किया था, इसी के चलते वहां सोशल मीडिया पर रोक लगा दी गयी थी जिसे सोशल मीडिया साइट्स के आश्वासन के चलते एक हफ्ते बाद उठाया गया :- http://www.business-standard.com/…/sri-lanka-lifts-ban-on-f…
  • अरब देशों में वैसे भी सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार, हेट स्पीच और हिंसक पोस्ट्स के खिलाफ कड़े क़ानून हैं, अभी मार्च 2017 की ही बात है कि दुबई में मालाबार गोल्ड एंड डायमंड में कार्यरत एक भारतीय को दुष्प्रचार करने ट्रॉलिंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर उस पर 250000 दिरहम का जुर्माना लगा कर भारत डिपोर्ट कर दिया गया था :- http://www.qatarday.com/…/-deportation-dh250000-fine-…/47629

कई देशों के कई उदाहरण है, जहाँ सोशल मीडिया पर हेट स्पीच, दुष्प्रचार, धार्मिक नफरत फ़ैलाने से तंग आकर कड़े क़ानून और सज़ाएं दी जा रही हैं, मगर भारत में इसका उल्टा हो रहा है, सोशल मीडिया पर नफरती गैंग्स को आशीर्वादों, और फॉलोविंग से नवाज़ा जा रहा है.

भारत में सोशल मीडिया के दुरूपयोग के हम सब गवाह हैं, इस मंच से नफरत, साम्प्रदायिकता फ़ैलाने, दुष्प्रचार करने, अफवाहें फ़ैलाने के लिए खुल कर इस्तेमाल हो रहा है, मुज़फ्फरनगर दंगा किसे याद नहीं है, एक फेक वीडियो को वायरल कर पूरे यूपी को दंगों की आग में झोंक दिया गया था, इसके अलावा भी हज़ारों उदाहरण हैं, जहाँ इस मंच के ज़रिये झूठ, साम्प्रदायिकता, दुष्प्रचार, नेताओं के चरित्र पर झूठे लांछन, फ़र्ज़ी और फोटोशॉप खबरे समाज और सौहार्द को तोड़ने हिंसा फैलाई गयी है, और ये क्रम जारी है.

सबसे दुखद बात ये है कि कई मामलों में खुद सत्ता पर क़ाबिज़ सियासी दल और उनके आईटी सेल इसमें भूमिका निभाते पाए गए, सोशल मीडिया पर नकेल या दुरूपयोग के लिए बने क़ानून का इस्तेमाल सत्ता में बैठे लोग, राजनैतिक प्रतिद्वंदियों और विरोधियों को डराने, दमन करने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

अब भी अगर विश्व में अन्य देशों की तरह भारत में सोशल मीडिया के इस निरंकुश दुरूपयोग पर नकेल नहीं कसी गयी तो लोगों को आपस में जोड़ने के लिए बना ये मंच लोगों को तोड़ने, समाज, सौहार्द, सद्भाव, और लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बनकर खड़ा हो जायेगा, तब तक देर हो चुकी होगी.