व्यक्तित्व

सायना का चेहरा नहीं देखना चाहती थीं उनकी दादी

सायना का चेहरा नहीं देखना चाहती थीं उनकी दादी

बैडमिंटन की दुनिया की सरताज साइना नेहवाल किसी परिचय की मोहताज नहीं है.मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी साइना ने दुनिया की नंबर वन खिलाड़ी बनने का जो सपना देखा था, वह अप्रैल, 2015 में पूरा हो गया. फिलहाल साइना दुनिया के 9 वें नंबर की खिलाड़ी हैं.
साइना नेहवाल का जन्म 17 मार्च, 1990 को हिसार, हरियाणा में हुआ. कहा जाता है कि साइना के जन्म की खबर सुनकर उनकी दादी ने साइना का चेहरा देखने से मना कर दिया था,क्योंकि उन्हें पोती नही बल्कि पोता चाहिए था.
माता-पि‍ता दोनों ही बैडमिंटन खि‍लाड़ी होने के कारण साइना नेहवाल की रुचि बचपन से ही बैडमिंटन में थी. साइना ने शुरुआती शिक्षा हरियाणा के हिसार से प्राप्त की और फिर बाकि की शिक्षा हैदराबाद में ही गृहण की. साइना नेहवाल ने जब बैडमिंटन खेलना शुरू किया था तो उनकी उम्र सिर्फ 6 वर्ष थी. उनके पिता हरवीर सिंह ने बेटी की रुचि को देखते हुए उसे पूरा सहयोग और प्रोत्‍साहन दि‍या.
साइना बचपन से ही बहुत मेहनती थीं, करियर के शुरुआती दिनों में 100 किमी दूर जाकर प्रैक्टिस किया करती थी. साइना को यहां तक पहुंचने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी है. पिता ने कर्ज लेकर इन्हें खिलाड़ी बनाया है. साथ ही उनकी मेहनत, लगन, कर्त्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम ने भी इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है. आज साइना को इतनी ऊँचाई पर देखकर हर भारतीय गौरवान्वित महसूस करता है.
दुनिया में बैडमिंटन खेल में भारत का नाम रोशन करने वाली साइना को बचपन में कराटे का शौक था और साइना कराटे में ब्लैक बेल्ट चैंपियन भी हैं. इसके अलावा साइना टेनिस खेलना भी बखूबी जानती हैं.
साइना के जीवन पर लिखी गयी किताब का नाम ‘साइना नेहवाल प्लेइंग टू विन-माई लाइफ ऑन एंड ऑन कोर्ट’है. जल्द ही उनके जीवन पर फ़िल्म भी बनने वाली है,जिसमें श्रद्धा कपूर उनकी भूमिका निभाएंगी.

खेल उपलब्धियाँ

1.साइना नेहवाल ने वर्ष 2005 में ‘एशियन सेटेलाइट बैडमिंटन जूनियर चेक ओपन’ का ख़िताब जीता.
2.साइना नेहवाल दो बार सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में रनर-अप रहीं.
3.2005 में राष्ट्रमंडल युवा खेलों की स्पर्धा में उन्होंने सात पदक जीतने में सफलता प्राप्त की.
4.साइना नेहवाल ने 2006 में ‘एशि‍यन सैटलाइट चैंपि‍यनशि‍प’ जीती.
5.2006 में मनीला में ‘फिलीपिंस ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप’ जीत कर इतिहास रच डाला.
6.साइना का नाम विश्व इतिहास में 21 जून, 2009 को लिखा गया, जब उन्होंने ‘इंडोनेशियाई ओपन’ जीतते हुए ‘सुपर सीरिज बैडमिंटन टूर्नामेंट’ का खिताब अपने नाम किया. यह उपलब्धि उनसे पहले किसी अन्य भारतीय महिला को हासिल नहीं हुई.
7.2010 में ऑल इंग्लैड बैंडमिटन के सेमीफाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव प्राप्त किया. उसके बाद चीन के ‘लिन वांग’ को जकार्ता में हराकर ‘सुपर सीरीज़ टूर्नामेंट’ जीता.
8.साइना अब तक तीन बार (2009, 2010 और 2012) इंडोनेशिया ओपन टूर्नामेंट जीत चुकी हैं.
9.साइना नेहवाल ओलम्पिक 2012 में कांस्य पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं.
10.2012 में साइना नेहवाल ने डेनमार्क ओपन खिताब जीता.

सम्मान और पुरस्कार

1.कांस्य पदक,लंदन ओलंपिक(2012)
2.अर्जुन पुरस्कार (2009)
3.राजीव गाँधी खेल रत्न (2009–2010)
4.पद्म श्री (2010)
5.पद्म भूषण (2016)

पदक रिकार्ड

1.रजत पदक, बैडमिंटन विश्व चैम्पियनशिप 2015
2.विजेता, ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज 2016
3 विजेता, इंडिया ओपन सुपर सीरिज 2015
4.विजेता, चाइना ओपन सुपर सीरिज 2014
5.विजेता, ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज 2014,2016
6.कांस्य पदक, उबेर कप 2014, दिल्ली
7.कांस्य पदक, लंदन ओलंपिक 2012
8.कांस्य पदक, एशियन चैंपियनशिप 2010, दिल्ली
9.स्वर्ण पदक, राष्ट्रमंडल खेल 2010, दिल्ली (एकल)
10.रजत पदक, राष्ट्रमंडल खेल 2010, दिल्ली (मिश्रित)
11.स्वर्ण पदक, वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2008, पुणे
12.कांस्य पदक, राष्ट्रमंडल खेल 2006, मेलबर्न
13.बैडमिंटन विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक 2017

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Durgesh Dehriya

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