व्हाट्सएप पर बच्चे चोरी करने की वायरल एक अफवाह और एक वीडियो क्लिप ने पिछले साल मई से लेकर मई 2018 तक 29 लोगों की ज़िंदगियाँ ख़त्म कर डालीं, और किसी को इसकी चिंता नहीं !
और अफवाह पर क़त्ल किये जाने की ये हैवानगी लगातार जारी है, हैरानी की बात ये है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर बिलकुल भी चिंतित नज़र नहीं आती, न जाने इस सरकार को जगाने के लिए और कितनी जानें जाएँगी और ये मॉब लिंचिंग एक राष्ट्रिय बहस का मुद्दा बनेगा.
बच्चे चोरी करने की ये अफवाहें बड़ी तेज़ी से आग की तरह फ़ैल रही हैं, तमिलनाडु से लेकर त्रिपुरा तक कलकत्ता से लेकर उत्तरप्रदेश तक, महाराष्ट्र से लेकर गुजरात तक, सस्ते स्मार्टफोन्स सस्ता इंटरनेट डाटा और डिजिटल जाहिल यूज़र्स इस आग को फ़ैलाने में आगे हैं.
दरअसल व्हाट्सएप पर एक वीडियो वायरल किया जा रहा है जिसमें बाइक पर सवार दो लोग सड़क पर से बच्चे को अगवा कर ले जाते हैं, ये वीडियो दरअसल पाकिस्तान का है और इसे जानबूझ कर इसलिए बनाया गया था, ताकि लोगों को बताया जा सके कि बच्चों को अगवा करना कितना आसान है, इसलिए अपने बच्चों को स्कूल्ज आदि के बाहर चौकन्ना रखें, मगर भारत में व्हाट्सएप पर इस वीडियो को स्थानीय बच्चा चोर गिरोह का बताकर वायरल किया जा रहा है ! और लोग इसे हर राज्य में हर भाषा में लगातार बिना सोचे समझे फॉरवर्ड किये जा रहे हैं.

दुःख की बात तो ये है कि बच्चा चोरी के बहाने की जाने वाली इस मॉब लिंचिंग पर देश के प्रधानमंत्री मोदी बिलकुल खामोश हैं, यदि वो एक बार टीवी पर आकर लोगों से निवेदन कर दें कि ये सिर्फ अफवाह है इस पर भरोसा ना करे या फिर देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह या सूचना प्रसारण मंत्री ऐसी कोई व्यवस्था करें कि इस तरह की खूनी अफवाहें बंद हो जाएँ. तो आगे कई लोगों की ज़िंदगियाँ बचाई जा सकती हैं.
सूचना क्रांति के इस दौर में कुछ भी असंभव नहीं, आप सभी जानते होंगे कि कई बार हमारे मोबाइल्स पर सरकार की कई योजनाओं में SMS आते हैं, कई बार मोदी जी के मन की बात सुनने के आग्रह आते हैं, ऐसे में अगर इन मॉब लिंचिंग के प्रति ज़रा भी संवेदनशील है तो उसके लिए इसे रोकना बहुत आसान है, वो लगातार हर मोबाइल यूज़र को इन अफवाहों से बचने के लिए सन्देश SMS दे सकती है, ये उसके लिए बाएं हाथ का खेल है.
मगर वोटों और प्रचार के लिए मोबाइल यूज़र्स को अनगिनत SMS भेजने वाली सरकार के लिए मॉब लिंचिंग शायद अभी भी कोई बड़ा मुद्दा नहीं है ! ये बहुत ही दुखद और चौंकाने वाली बात है.

सोर्स  – द प्रिंट
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Syed Asif Ali

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