13 सितंबर 1500 का समय था, जब पुर्तगाली व्यापारी पेड्रो अल्वारेस कैब्रेल ( Pedro Álvares Cabral  ) ने भारतीय उप महाद्वीप के कालीकट में पहली यूरोपियन फैक्टरी को स्थापित की थी। हालांकि, बहुत जल्द इस व्यापारी को कालीकट (kalikat) छोड़ कोचीन (kochin) विस्थापित होना पड़ा।

पेड्रो का भारत आने का उद्देश्य भारत के बहुमूल्य मसालों (spice) को अपने देश ले जाकर भारी मुनाफ़ा कमाना था। इसके साथ ही भारत से अच्छे व्यपार संबंध स्थापित करना भी उसका महत्वपूर्ण उद्देश्य था।

बहुमूल्य मसालों के लिए आया था भारत:

पेड्रो अल्वारेस कैब्रेल एक यूरोपीय पुर्तगाली था। जिसका जन्मपुर्तगाल के बेलमोंटे में 1467 या 68 के आस पास का माना जाता है। पेड्रो एक नाविक और खोजकर्ता था।  लेकिन ब्राज़ील की खोज के बाद उसे ब्राज़ील खोजकर्ता के नाम से भी जाना जाने लगा।पेड्रो के प्रारंभिक जीवन के बारे में किसी को कोई ठोस जानकारी नहीं है। कोई कहता है कि वह एक पुर्तगाली राजकुमार था, तो कोई कहता है वह पुर्तगाल के मध्यम कुलीन वर्ग से सम्बंध रखता था। जिसने अच्छी शिक्षा प्राप्त की थी।

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वर्ष 1500 में पेड्रो को भारतीय उपमहाद्वीप में एक विशेष अभियान में नेतृत्व करने वाला चुना गया था। यह अभियान भारत से बहुमूल्य मसाले लेकर उनसे मुनाफा कमाने का था। पेड्रो को इस अभियान में उन मार्गों का प्रयोग करना था जो वास्को डी गामा ने खोजे थे।


1497 में वास्को डी गामा ने दक्षिणी अटलांटिक महासागर के पश्चिम में भूमि के संकेत दर्ज किए थे। इन्हीं मार्गों के माध्यम से पेड्रो ने चार महाद्वीप को छूने वाले अभियान का नेतृत्व किया। इन चार महाद्विपों में यूरोप,अफ्रीका,अमेरिका और एशिया शामिल थे।

सफ़र में की थी ब्राज़ील की खोज:

13 जहाज़ों के एक बेड़े के साथ पेड्रो अल्वारेस अपने अभियान के लिए निकल पड़ा।अटलांटिक महासागर में उसका ये बेड़ा काफी दूर तक गया,ये एक सोचा समझ निर्णय था।इसी दौरान अप्रैल 1500 में पेड्रो को महासागर में एक बड़ा द्वीप मिला, इस पर 1494 की टॉर्डेसिलस की संधि के अनुसार कैब्रेल ने पुर्तगाली ताज के लिए इस पर दावा किया।

इस संधि के अनुसार कोई भी नई भूमि पुर्तगाली क्षेत्र के भीतर आती थी। पेड्रो ने द्वीप के जानकारी पुर्तगाल के राजा मैनुअल 1 को भेजी। पैड्रो ने जिस द्वीप को खोज निकाला था वो दक्षिण अमेरिका था, जिसे बाद में ब्राज़ील के नाम से जाना गया।

पहले देखा तूफ़ान का मंजर,फिर पहुंचा कालीकट:

दक्षिण अमेरिका में ब्राजील की खोज के बाद पैड्रो ने बेड़े का रूख पूर्व की ओर मोड़ लिया।इस बेड़े का अगला पड़ाव भारत था। लेकिन भारत आने से पहले ही इन्हें एक बड़े तूफान का सामना अटलांटिक महासागर में करना पड़ा गया। इसमें कई जहाज़ों को नुकसान पहुंचा।

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हालांकि, भारत में कालीकट पहुंचने से पहले मोजाम्बिक चैनल में सभी जहाज़ एक दूसरे से मिल गए। कैब्रेल कालीकट से व्यापारिक अधिकारों पर बातचीत करने में सफल रहा, और कालीकट में अपने व्यापार के लिए एक उद्योग स्थापित कर दिया। इसके माध्यम से भारतीय मसालों को विशेषकर काली मिर्च (जो उस वक्त सबसे महंगे मसले में गिनी जाती थी) को यूरोप भेजा जाना था। लेकिन एक साजिश के चलते अचानक उद्योग नष्ट हो गया।

कालीकट में नरसंहार:

उस वक्त भारत मे मसालों के व्यपार पर अरब, तुर्की और इटली का एकाधिकार था, जिसे पुर्तगाली व्यापारियों को दरकिनार करना था। कालीकट में पुर्तगालीयो ने उद्योग स्थापित किया, लेकिन अरब व्यापारियो ने मौका देख पुर्तगाली एंट्रेपेट पर मुसलमानों और हिंदुओं दोनों को हमले के लिए उकसाया। 

इस हमले में पेड्रो के बेड़े के न केवल लोग हताहत हुए बल्कि स्थापित की गई सुविधा भी नष्ट हो गयी। कैब्रेल ने अरब बेड़े को लूटकर और जलाकर इस हमले का प्रतिशोध लिया और फिर अपने शासक के अप्रत्याशित हमले की व्याख्या करने में विफल रहने के प्रतिशोध में शहर पर बमबारी भी की।

कालीकट से विस्थापित हो कर कोचीन पहुंचे:

कालीकट में मानव जीवन और जहाज़ों के नुकसान के बाद अब पेड्रो भारत के ही दूसरे राज्य कोचीन चला गया। वहां के शासक से मित्रता की और यूरोप लौटने से पहले अपने जहाज़ों को मसालों से लाद लिया। कालीकट में हुए नरसंघार के बाद भी पेड्रो की ये सफलता ही थी कि वो मसालों से भरा जहाज़ लेकर यूरोप पहुंचा था।

इन मसालों की बिक्री से होने वाले असाधारण मुनाफे ने पुर्तगाली क्राउन के वित्त को मजबूत किया और एक पुर्तगाली साम्राज्य की नींव रखने में भी मदद की। जो अमेरिका से सुदूर पूर्व तक फैला गया था। पेड्रो पुर्तगाल के तत्कालीन शासक के साथ मैनुअल 1 के साथ झगड़े के बाद निजी जीवन मे सेवानिवृत्त हो गया। इसके बाद 1520 में पुर्तगाल के सैंटारेम में पेड्रो की मृत्यु हो गयी।

पेड्रो है डिस्कवरी युग का प्रमुख व्यक्ति:

19वीं शताब्दी में पुर्तगाल से ब्राजील को स्वतंत्रता मिली। जिसके दशकों बाद, ब्राजील के सम्राट पेड्रो द्वितीय ने कैब्रल की प्रतिष्ठा को दोबारा जीवित करने का प्रयास किया। इतिहासकारों ने लंबे समय से तर्क किया है कि क्या सच में कैब्रेल ब्राजील के खोजकर्ता थे? और क्या यह खोज आकस्मिक थी या जानबूझकर की गई थी।

पहले प्रश्न को इस अवलोकन से सुलझाया गया है कि उस समय कुछ खोजकर्ताओं को सरसरी मुठभेड़ करते देखा गया था।इसके आधार पर यह कहना कि उस द्वीप की खोज पेड्रो ने की है, गलत होगा। वहीं पेड्रो ने भविष्य के विकास और उस भूमि के इतिहास में कोई योगदान नहीं दिया जो बाद में ब्राजील बन गया।

दूसरे प्रश्न पर, कोई निश्चित सहमति नहीं बनी है, और खोज की परिकल्पना में ठोस प्रमाण का अभाव भी है। हालांकि उस जमीन की खोज में समकालीन खोजकर्ताओं की भूमिका है। इसलिए इतिहासकार कैब्रल को डिस्कवरी के युग का एक प्रमुख व्यक्ति मानते हैं ।

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Sushma Tomar