जर्मनी, हिटलर और दोनों का त्रासद अंत

जर्मनी, हिटलर और दोनों का त्रासद अंत

1937 तक आते आते नाज़ी पार्टी खत्म हो गयी थी और अगर कुछ बचा था, तो हिटलर, उन्माद और गोएबेल। लोकतांत्रिक माध्यम से पाई सत्ता कैसे शनैः शनैः झूठ, जुमलों, घृणा, दुष्प्रचार, मिथ्या अहंकार आदि आदि के लबादों में छिपते छिपाते एक बर्बर तानाशाही का रूप ले लेती है, यह जर्मनी के इतिहास का यह […]

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 (मत) बोल के आजाद (नहीं) हैं लब तेरे

(मत) बोल के आजाद (नहीं) हैं लब तेरे

देश बदल रहा है। अब बोलने पर पाबंदी आयद की जा रही है। तरीका अलग है। यूं संवैधानिक तौर पर बोलने की आजादी है, लेकिन बोलना गुनाह बना दिया गया है। कह दिया गया है कि अगर बोलना है, तो सत्ता के समर्थन में बोलिए। हमारी हर नीति का समर्थन कीजिए। जो नहीं करेगा, वह […]

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