जब नेहरू की मौत की खबर सुनकर शेख अब्दुल्ला फूट फूट कर रोये थे.

जब नेहरू की मौत की खबर सुनकर शेख अब्दुल्ला फूट फूट कर रोये थे.

शेष नारायण सिंह 1947 में कश्मीर का मसला जब संयुक्त राष्ट्र में ले जाया गया तो संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पास हुआ कि कश्मीरी जनता से पूछ कर तय किया जाय कि वे किधर जाना चाहते हैं . भारत ने इस प्रस्ताव का खुले दिल से समर्थन किया लेकिन पाकिस्तान वाले भागते रहे , उस […]

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 नेहरू की तरह नरेंद्र मोदी के पास बौद्धिक लोगो का वर्ग नही है

नेहरू की तरह नरेंद्र मोदी के पास बौद्धिक लोगो का वर्ग नही है

4 साल सत्ता मे रहने के बावजूद नरेंद्र मोदी अपने खुद का मजबूत एलीट वर्ग (अभिजात वर्ग) तैयार करने मे नाकाम रहे हैं। उनके परम्परागत और सोशल मीडिया मे मजबूत समर्थक हैं। उनके पास कुछ बौद्धिक लोग हैं जो उनके समर्थन मे मुख्यधारा के अखबारो मे कालम लिखते हैं। कार्पोरेट वर्ल्ड मे भी उनके वफादार […]

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 देश के लिए धर्मनिरपेक्षता और संविधान का महत्व

देश के लिए धर्मनिरपेक्षता और संविधान का महत्व

एक वक्त वह भी था जहां हम भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और विभिन्न संप्रदायों के समूहों का देश, के रूप में देख सकते थे और इस बाबत संविधान या किसी और दस्तावेज़ में किसी प्रकार की कोई घोषणा करने की कहीं जरूरत नहीं थी. ना ही किसी प्रकार के आधिकारिक ऐलान की जरूरत थी. […]

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 जब फ़िरोज़ गांधी ने किया, देश के पहले घोटाले का ख़ुलासा

जब फ़िरोज़ गांधी ने किया, देश के पहले घोटाले का ख़ुलासा

आज़ाद हिंदुस्तान का पहला वित्तीय घोटाला 1958 में हुआ था. इसे मूंदड़ा घोटाला भी कहा जाता है क्योंकि इसे अंजाम देने वाले का नाम हरिदास मूंदड़ा था. यह पहला घोटाला था जिसमें व्यापारी, अफ़सर और सरकार शामिल थी. इस घोटालें के बारे में रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब ‘इंडिया आफ्टर गाँधी’ में विस्तृत रूप से […]

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 जन्मदिन विशेष –  धर्मनिरपेक्षता के पैरोकार पंडित नेहरू

जन्मदिन विशेष – धर्मनिरपेक्षता के पैरोकार पंडित नेहरू

आज स्वंतत्रता सेनानी, भारतरत्न और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जयंती है. आइये हम उनके भारत के प्रधानमंत्री रहते हुए बिताये कुछ अभूतपूर्व पलों को संजोते हुए उनके एक किस्से याद करते है. अधिकांश किस्से इतिहासकार व लेख़क  रामचंद्र गुहा रचित किताब ‘इंडिया आफ्टर गाँधी’ से उद्धृत है. आजादी के बाद वाले दशक […]

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