सांप्रदायिकता के प्रबल विरोधी थे “नेताजी सुभाष चंद्र बोस”

सांप्रदायिकता के प्रबल विरोधी थे “नेताजी सुभाष चंद्र बोस”

23 जनवरी का दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती का दिन होता है। सुभाष एक विलक्षण प्रतिभासंपन्न और अपनी तरह के अनोखे स्वाधीनता संग्राम सेनानी थे। सांप्रदायिकता और राष्ट्रवाद के बारे में आज,  उनका एक प्रसिद्ध उद्धरण पढें हिंदू महासभा भारतीय राष्ट्रवाद का यह शत्रु तत्व है और इसे हराने की हमारी चुनौती है। […]

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 नेताजी सुभाषचंद्र बोस और साम्प्रदायिक राजनीति (पार्ट-2)

नेताजी सुभाषचंद्र बोस और साम्प्रदायिक राजनीति (पार्ट-2)

सुभाष बाबू 1938 के कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे। उनके अध्यक्ष बनने के बाद ही कांग्रेस में वैचारिक संघर्ष भी छिड़ गया था। वे 1921 से 1940 तक कांग्रेस में रहे। फिर उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया। 1939 में उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक नामक दल का गठन किया जो प्रगतिशील विचारों का […]

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 "नेताजी सुभाषचन्द्र बोस और साम्प्रदायिक राजनीति", एक चर्चा-1

"नेताजी सुभाषचन्द्र बोस और साम्प्रदायिक राजनीति", एक चर्चा-1

12 मई 1940 को बंगाल के झाड़ग्राम नामक एक स्थान पर बंगाल में हिन्दू महासभा के प्रचार के तरीके पर टिप्पणी करते हुये, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने निम्न पंक्तियां कहीं थीं। ” हिन्दू महासभा ने वोट लेने के लिये सन्यासियों और सन्यासिनियों का एक दल बना रखा है जो हांथो में त्रिशूल ले कर […]

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