नज़रिया – पैसे पेड़ पर नही ऊगते..

नज़रिया – पैसे पेड़ पर नही ऊगते..

हम जो लिब्रेलाइजेशन की औलादें है। हम जो पिछले बीस सालों में कॉलेज से निकलकर धन्धे पानी और जॉब में है.. एक घमण्ड में रहे। घमण्ड ये, की विकास सरकारें नही, हम करते हैं, जनता करती है। गुमान था, कि सरकार चाहे कोई आये, विकास तो होता रहेगा। इसलिए विकास “फार ग्रांटेड” था। तो हमें […]

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 नज़रिया – क्या देश के ही नागरिकों से भेदभाव कर विश्वशक्ति बन पायेगा भारत?

नज़रिया – क्या देश के ही नागरिकों से भेदभाव कर विश्वशक्ति बन पायेगा भारत?

कल मेरे एक संघी मित्र ने कहा कि आप क्या सोचते हैं कि – “यदि देश का बटवारा नहीं हुआ होता तो आज भारत दुनिया की एक बड़ी शक्ति होता ?” मैंने कहा – “निश्चित रूप से परन्तु भारत दुनिया की एक बड़ी शक्ति बटवारे के बावजूद भी बन सकता था यदि देश में देशवासियों […]

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 नज़रिया – कांवरियों की भीड़ पर नियंत्रण अधिक ज़रूरी है न कि पुष्पवर्षा

नज़रिया – कांवरियों की भीड़ पर नियंत्रण अधिक ज़रूरी है न कि पुष्पवर्षा

यातायात नियंत्रण और लोग सड़क पर चल कर सुरक्षित तथा सुव्यवस्थित तरह से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें, इसका तो प्रशिक्षण पुलिस को दिया गया है, पर पुष्पवर्षा का तो कोई पाठ पढ़ाया ही नहीं गया है. पुष्पवर्षा भी उनपर जो उन्हीं कानूनों को तोड़ रहे हैं, और उनके द्वारा, जो उन कानूनों को लागू करने […]

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 नज़रिया – जनता किसी गिनती में भी है क्या ?

नज़रिया – जनता किसी गिनती में भी है क्या ?

आपकी तादाद सिर्फ “वोट” के लिए गिनी जाती है,की ये इतनी आबादी है,वरना बताइये कहा है आपकी गिनती? क्या समझते है आप 110000 हज़ार करोड़ के घोटालें,9000 करोड़ का गबन और 2 लाख करोड़ का स्कैम ये जो बड़ी बड़ी गिनतियां आपको गिनाई जा रही है ये क्या है। ये इतनी बड़ी बड़ी रकमें मज़ाक […]

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