8 दिसंबर के भारत बंद के बाद किसान आंदोलन में क्या क्या हुआ ?

8 दिसंबर के भारत बंद के बाद किसान आंदोलन में क्या क्या हुआ ?

8 दिसंबर, को किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में भारत बंद का आह्वान किया था। बंद सफल रहा । सबसे उल्लेखनीय यह बात थी कि, इस बंद में देश मे कहीं से भी हिंसा के समाचार नहीं मिले। लंबे समय के बाद, देश मे जनहित के मुद्दे पर जनता जागरूक दिखी और उसने अपने […]

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 किसानों के मन की बात भी तो सुनिये, सरकार ?

किसानों के मन की बात भी तो सुनिये, सरकार ?

यूं ही हमेशा उलझती रही है, ज़ुल्म से खल्क, न उनकी रस्म नयी है, न अपनी रीत नयी, यू ही हमेशा, खिलाये हैं हमने आग में फूल, न उनकी हार नयी है, न अपनी जीत नयी ! मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब की यह कालजयी पंक्तियां, आज भी प्रासंगिक हैं और कभी भी कालबाधित […]

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 किसानों का यह आंदोलन क्या बदलाव की एक नयी इबारत लिख पायेगा ?

किसानों का यह आंदोलन क्या बदलाव की एक नयी इबारत लिख पायेगा ?

2014 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रबल झंझावात के बल पर भाजपा/ एनडीए की सरकार बनी थी। उम्मीदे भी थी, और गुजरात मॉडल का मायाजाल भी। नरेंद्र मोदी की क्षमता पर ज़रूरत से ज्यादा लोगों को भरोसा भी था। कांग्रेस का दस वर्षीय कार्यकाल खत्म हो रहा था। सबसे अधिक उम्मीद थी कि 2014 में […]

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 कृषि क्षेत्र में खुला बाज़ार प्रणाली यूरोप और अमेरिका में पहले ही फेल हो चुकी है

कृषि क्षेत्र में खुला बाज़ार प्रणाली यूरोप और अमेरिका में पहले ही फेल हो चुकी है

( यह लेख मूल रूप से कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा जी ने हिंदुस्तान अखबार के लिए लिखा था, विजयशंकर सिंह जी उस लेख के ही कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को छाँटकर संपादित किया है, साभार – हिंदुस्तान ) अमेरिका के एक किसान ने 2018 में मक्का जिस कीमत पर बेचा, मक्के की उससे ज्यादा कीमत उसके […]

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 चुनावों में गायब हो रहे हैं जीवन से जुड़े मुद्दे

चुनावों में गायब हो रहे हैं जीवन से जुड़े मुद्दे

किसी भी देश मे चुनाव जनमत का अक़्स होता है। यह जनता की राय नहीं होती है यह केवल जनता का इतना मत होता है कि वह अमुक दल या व्यक्ति को चाहती है या अमुक व्यक्ति या दल को नहीं चाहती है। जिस विंदु पर जनता की राय ली जाती है, वह प्रक्रिया जनमतसंग्रह […]

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 किसानों को उल्लू बनाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं राष्ट्रवाद के नारे – रविश कुमार

किसानों को उल्लू बनाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं राष्ट्रवाद के नारे – रविश कुमार

ग्रामीण इलाके में न सिर्फ खेती से आय घटी है बल्कि खेती से जुड़े काम करने वालों की मज़दूरी भी घटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी इस असफलता को आतंकवाद और राष्ट्रवाद के जोशीले नारों से ढंकने की कोशिश में हैं मगर पांच साल में उस जगह को बर्बाद किया है जहां से किसान आता […]

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 वरुण गांधी ने कहा – किसानों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

वरुण गांधी ने कहा – किसानों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

एक के बाद एक अपनी ही पार्टी के नेताओं के बगावती तेवर से परेशान भाजपा के लिये एक और परेशानी बढ़ाने वाली खबर सामने आई है. ख़बरों के मुताबिक़ नई दिल्ली में इंडिया डायलॉग कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरुण गांधी ने मोदी सरकार को किसानों के मुद्दों पर घेरा है. वरुण गांधी ने इण्डिया […]

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 कर्ज़माफ़ी भीख नहीं किसानों का हक़ है

कर्ज़माफ़ी भीख नहीं किसानों का हक़ है

मिडिल क्लास को बड़ा गुरूर है टैक्स देने का. चले तो आख़िरी चवन्नी बचाने लेने वाला यह क्लास किसानों की कर्ज़माफ़ी को लेकर बहुत उछल रहा है मानो उसकी तनख्वाह से पैसा काट के दिया गया है. उसे लगता है देश उसी के पैसे से चलता है तो दुनिया की सारी सुविधा उसी को मिलनी […]

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 देश के 17 राज्यों के 25000 भूमिहीन क्यों चल रहे हैं पैदल ?

देश के 17 राज्यों के 25000 भूमिहीन क्यों चल रहे हैं पैदल ?

भारत की आज़ादी की लड़ाई में ज़मीन हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा। संथाल विद्रोह, बारडोली से लेकर चंपारण सत्याग्रह तक हर संघर्ष में ज़मीन एक केंद्रीय मुद्दा बना रहा। अंग्रेजों ने रजवाड़ों और ज़मींदारों को भारतीयों के शोषण का माध्यम बना रखा था, क्योंकि भारतीय अधिकतर किसान थे इसीलिए भूमि पर उनके अधिकार छीनकर उन्हें आराम से […]

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 मध्यप्रदेश में सरकारी व्यवस्थाओं के शिकार एक और किसान की मौत

मध्यप्रदेश में सरकारी व्यवस्थाओं के शिकार एक और किसान की मौत

लगता है जैसे किसानों को लेकर सरकार का रवैया अब बदलने वाला नहीं है. भारतीय जनता पार्टी की राज्य और केंद्र की सरकार ये मानकर बैठी है, कि कुछ भी हो जाये जनता हिंदुत्व के नाम पर उन्हें ही वोट देगी. इसी बीच किसानों की मृत्यु की खबरें देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही […]

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