क्या आपको ये हत्याएं एक जैसी नज़र नहीं आती

क्या आपको ये हत्याएं एक जैसी नज़र नहीं आती

मता-ए-लौह-ओ कलम छिन गई तो क्या गम है कि खून ए दिल में डूबो ली हैं उंगलियां मैंने RIP Freedom of Expression फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का आलम ये है कि सोशल मीडिया पर अगर आप अपने देश के प्रधानमंत्री से ये पूछते हैं कि वो सिलेक्टिव साइलेंस क्यों अख्तियार करते हैं,तो आप से पलट के […]

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