चुनाव और निर्वाचन आयोग की साख – एक प्रतिक्रिया

चुनाव और निर्वाचन आयोग की साख – एक प्रतिक्रिया

राजनीति में उखाड़ पछाड़ चलता रहता है। यह सनातन है। उसी तरह से संसदीय लोकतंत्र में हार जीत होती रहती है। बिल्कुल एक बनारसी कहावत की तरह, कभी घनीघना, कभी मुट्ठी भर चना कभी वह भी मना। लेकिन संसदीय लोकतंत्र को पटरी पर बनाये रखने के लिये जिन संस्थाओं का गठन संविधान में किया गया […]

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 सवाल चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का है

सवाल चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का है

25 अक्टूबर 1951 को आज़ाद भारत ने पहली बार आम चुनाव में हिस्सा लिया, मतदान की प्रक्रिया चार महीने तक चली, इसी के साथ भारत ने दुनिया में सबसे बड़ा लोकतंत्र बनने के लिए पहली सीढ़ी पर अपना कदम रखा। तब से आज तक भारत अपनी लोकतांत्रिक गरिमा को विश्व के समक्ष मिसाल के रूप […]

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