नज़रिया – पैसे पेड़ पर नही ऊगते..

नज़रिया – पैसे पेड़ पर नही ऊगते..

हम जो लिब्रेलाइजेशन की औलादें है। हम जो पिछले बीस सालों में कॉलेज से निकलकर धन्धे पानी और जॉब में है.. एक घमण्ड में रहे। घमण्ड ये, की विकास सरकारें नही, हम करते हैं, जनता करती है। गुमान था, कि सरकार चाहे कोई आये, विकास तो होता रहेगा। इसलिए विकास “फार ग्रांटेड” था। तो हमें […]

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