नज़रिया – इंतज़ार कीजिये, भीड़ आपके दरवाज़े पर कब दस्तक देती है

नज़रिया – इंतज़ार कीजिये, भीड़ आपके दरवाज़े पर कब दस्तक देती है

इतिहास साक्षी है के प्रथम विश्व युद्ध के बाद यूरोप में अराजकता का चरम था. युद्ध के बाद अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो चुकी थी. युवा वर्ग बेरोज़गारी के कारण बदहवास था और वर्तमान सत्ता से निराश आम जनों का विश्वास लोकतंत्र पर कमज़ोर हो रहा था. विरोध के स्वर उठ रहे थे. प्रदर्शन हड़तालों की सिलसिला […]

Read More