व्यंग – एक बोतल और क़सम पर बिकता लोकतंत्र

व्यंग – एक बोतल और क़सम पर बिकता लोकतंत्र

रामलाल अपने दरवाजे पर निश्चिन्त बैठा हुआ था. उतना ही निश्चिन्त जितना कि दोनों हाथों से तंबाकू बनाते हुए एक आम भारतीय हो सकता है. चुनाव से पहले भारत में एक खास प्रकार का रोजगार पैदा होता है. ये रोजगार सरकार पैदा नहीं करती. ये उनकी जरुरत बन जाती है. इसे जनता अपनी चालाकी से […]

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 क्या लोकतांत्रिक देश में आलोचनात्मक कार्टून शेयर करना, राजद्रोह है ?

क्या लोकतांत्रिक देश में आलोचनात्मक कार्टून शेयर करना, राजद्रोह है ?

खबर है, की फेसबुक पर एक कार्टून पोस्‍ट करने के आरोप में छत्तीसगढ़ के पत्रकार कमल शुक्‍ला के ऊपर देशद्रोह का मुकदमा कायम हुआ है. मीडिया विजिल की एक ख़बर के मुताबिक़ कमल शुक्‍ला के खिलाफ कांकेर जिला के कोतवाली थाने में मुकदमा कायम हुआ है. कांकेर के एसपी के मुताबिक कमल शुक्‍ला के ऊपर […]

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 "भारतीय संविधान", जो भारत को बनता है एक "लोकतांत्रिक गणतंत्र"

"भारतीय संविधान", जो भारत को बनता है एक "लोकतांत्रिक गणतंत्र"

वो संविधान जिसने सबको बराबर बनाया, वो संविधान जिसने सबको सीन चौड़ा करके जीना सिखाया,वो संविधान जिसने सर उठाकर हर शख्स को बोलने,लिखने,पढ़ने,और अपने लिए आवाज़ उठाने का अधिकार दिया,वही संविधान जिसने फूहड़,दकियानूसी,धर्मान्ध,नीच और गिरी सोच को चकनाचूर कर दिया वही संविधान जिसने हर इंसान को जाति,धर्म,पैसा और इलाके से ऊपर उठकर सबको बराबर बना […]

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