डरता हूँ कि कहीं इस डर से लोग सच बोलना न बंद कर दें

डरता हूँ कि कहीं इस डर से लोग सच बोलना न बंद कर दें

एक साया सा फ़ैल गया है हर सिम्त दिल के भीतर / और वहीं बैठ गया है चुपचाप आजकल एक डर मन करता है उस डर को उलीच दूँ यहां पर डर को उलीचना और भी ज्यादा डर से भर जाना है. सामने पार्क में खेलता बच्चा जोर से हंसता है और मैं उसकी हंसी […]

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 क्या पूरे डिब्बे में एक भी शख़्स ऐसा नहीं था जिसमें इंसानियत बाक़ी थी – शहज़ादा कलीम

क्या पूरे डिब्बे में एक भी शख़्स ऐसा नहीं था जिसमें इंसानियत बाक़ी थी – शहज़ादा कलीम

ख़ामोशी तो अब तोड़नी पड़ेगी… क्योंकि इंसानियत अब मर चुकी है… कहाँ हैं फेसबुक पर नफ़रतों से भरे मुल्ला और कटुवा कहकर ग़ाली देने वाले लोग… दीजिये ख़ूब गालियाँ… लेकिन याद रखना यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब देश टकराव का ज़ख्म झेलेगा..और उस वक़्त न तो नफ़रतों के लिए जगह बचेगी […]

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