किस्से कहानियों और फिल्मों में हम जो पिशाच का चित्रण देखते हैं, वह गलत होता है। पिशाच के दो नुकीले दांत आगे की ओर निकले नहीं होते। उसका चेहरा भयानक नहीं होता। पिशाच तो हम में से ही अच्छी शक्ल ओ सूरत वाला और पढ़ा-लिखा भी हो सकता है।
पिशाच होने के लिए अशिक्षित, विक्षिप्त, अर्धविक्षिप्त या मानसिक रूप से बीमार होना भी नहीं होता। अगर आपको मेरी बात का यकीन नहीं है तो उस औरत के पीछे दौड़ रही भीड़ के चेहरों को देखिए, जो उसे नंगा करके पीट रही है। वे सब चेहरे हमारे-तुम्हारे जैसे ही हैं। किसी के भी दो नुकीले दांत बाहर की ओर नहीं निकले हुए हैं। लेकिन वे पिशाच हैं। ऐसे पिशाच जो समाज में रच-बस गए हैं। वे कभी भी इतने हिंसक हो जाते हैं कि एक औरत को सरेराह नंगा कर सकते हैं। इन पिशाचों का एक नहीं, कई-कई खुदा हैं।
उनके खुदाओं ने उन्हें यकीन दिला रखा है कि आपका बाल भी बांका नहीं होगा। अगर आप पकड़े भी गए तो आप हीरो बना दिए जाओगे। हम आपका फूल मालाओं से स्वागत करेंगे। उन्होंने ऐसा किया भी है। इसलिए पिशाचों की तादाद बढ़ती जा रही है। सावधान रहें, हो सकता है कि आपके घर के अंदर ही आपका बेटा, आपका भाई, आपका कोई भतीजा या भांजा पिशाच बन बैठा हो।
रोज शाम को गोदी मीडिया उसके अंदर विकसित हो रहे पिशाच को खुराक देने के लिए बैठ जाता है। यह खुराक राष्ट्रवाद की चाशनी में लपेटकर दी जाती है, जिससे पिशाच और ज्यादा मजबूत होता है, तेजी से होता है। वह इतना खतरनाक हो जाता है कि किसी की जान लेने पर वह खुश होता है। समझता है कि उसने देश के लिए यह काम किया है। उसके खुदा भी यही बताते हैं कि राष्ट्रवाद के लिए खून बहाना गुनाह नहीं है। कानून की नजर में गुनाह हो सकता है, लेकिन हमारी निगाह में नहीं है। कानून की कई मजबूरियां होती हैं। उसे दिखावे के लिए ही सही, काम करना पड़ता है।
लेकिन कानून भी जानता है कि एक राष्ट्रवादी पिशाच को कैसे बचाया जाता है। इसलिए पिशाच अदालत से जल्दी ही जमानत पा जाता है। वह हीरो बनकर बाहर आता है। लोग उसकी झांकी निकालते हैं। दूसरों को यह दिखाने के लिए कि तुम भी राष्ट्र के लिए खून बहाओगे तो तुम्हारा भी ऐसा ही स्वागत किया जाएगा। सतत प्रक्रिया चल रही है। जो यह समझे बैठे हैं कि वे पिशाच के पंजों से बचे रहेंगे, वे गलत समझते हैं।

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Saleem Akhtar Siddiqui