बुलंदशहर की हिंसा की तह में जाने से पहले 2002 के गुजरात में जाइए

बुलंदशहर की हिंसा की तह में जाने से पहले 2002 के गुजरात में जाइए

बुलंदशहर की हिंसा की तह में जाने से पहले 2002 के गुजरात में जाइए। गोधरा को याद किजिए, उसके बाद हुए दंगों को याद कीजिए। दंगों के बाद गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री हरेन पांडया की हत्या के पसमंजर को देखिए। हरेन पांडया के माता-पिता के दुख को महसूस कीजिए। सोहराबुद्दीन शेख का फर्जी एनकाउंटर याद […]

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 #MeToo : सेलिबे्रटिज का अभियान सेलिब्रेटिज के लिए

#MeToo : सेलिबे्रटिज का अभियान सेलिब्रेटिज के लिए

क्या कभी ऐसा सोचा गया था कि मीटू की सुनामी आएगी और उसमें बड़े-बड़े लोगों का तथाकथित माज़ी इस तरह सामने आएगा कि वे जिन्हें हम अपने-अपने क्षेत्र के ‘हीरो’ की तरह देखते हैं, ‘विलेन’ नजर आने लगेंगे? किसने सोचा था कि पत्रकारिकता के क्षेत्र का मजबूत पिलर माने जाने वाले एमजे अकबर पर एक-एक […]

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 हर गलत कृत्य को मान्यता देने सोशल मीडिया में बैठा है भीड़तंत्र

हर गलत कृत्य को मान्यता देने सोशल मीडिया में बैठा है भीड़तंत्र

भीड़ तंत्र सोशल मीडिया पर भी मौजूद है। वह भले ही लोगों की खुद जान न लेता हो, लेकिन वह हिंसक समाज बनाने में मददगार साबित हो रहा है। कुतर्कों से अपराध को जस्टिफाई किया जा रहा है। सोशल मीडिया में उन लोगों की बहुतयात है, जिन्होंने अपने चेहरों पर राजनीतिक दलों, धार्मिक संगठनों और […]

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 कल्पना तिवारी की चीत्कार में नौशाद और मुस्तकीम की मां की चीत्कार शामिल क्यों नहीं है?

कल्पना तिवारी की चीत्कार में नौशाद और मुस्तकीम की मां की चीत्कार शामिल क्यों नहीं है?

कल दिल्ली जाते हुए सोशल मीडिया से विवेक तिवारी की हत्या का समाचार मिला। ज्यादा जानकारी लेने के लिए एक अखबार की वेबसाइट पर गया तो वहां जाकर दिमाग सुन्न हो गया। खबर का कमेंट बॉक्स उन लोगों से भरा था, जो हत्या को सही ठहरा रहे थे। सोचने लगा कि ये कौन लोग हैं, […]

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 आखिर संघ परिवार में चल क्या रहा है ?

आखिर संघ परिवार में चल क्या रहा है ?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कथनों का क्या मतलब है, यह मुझे नहीं मालूम। बहुत लोगों को मालूम नहीं होगा। खुद संघियों को भी नहीं मालूम होगा कि भागवत की बातों का मतलब क्या है? क्या वह सरकार से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं? क्या वह कांग्रेस पर डोरे डाल रहे हैं? क्या मुसलमानों को […]

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 नज़रिया – आरएसएस की भागीदारी के बगैर सफल नहीं होता कोई आंदोलन

नज़रिया – आरएसएस की भागीदारी के बगैर सफल नहीं होता कोई आंदोलन

अपनी आंखें बंद कीजिए और सोचिए। क्या आजाद भारत में कभी आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक की भागीदारी के बगैर कोई आंदोलन कामयाब हुआ है? आजादी के लिए हुए आंदोलनों में जरूर आरएसएस अलग रहा, लेकिन आजादी के बाद हुए आंदोलनों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसकी हर उस आंदोलन में भागीदारी रही है, जो […]

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 सुनिए महाशय ! आप औरत को नंगा करके घुमाने वाले समाज का हिस्सा हैं.

सुनिए महाशय ! आप औरत को नंगा करके घुमाने वाले समाज का हिस्सा हैं.

किस्से कहानियों और फिल्मों में हम जो पिशाच का चित्रण देखते हैं, वह गलत होता है। पिशाच के दो नुकीले दांत आगे की ओर निकले नहीं होते। उसका चेहरा भयानक नहीं होता। पिशाच तो हम में से ही अच्छी शक्ल ओ सूरत वाला और पढ़ा-लिखा भी हो सकता है। पिशाच होने के लिए अशिक्षित, विक्षिप्त, […]

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 दलितों के इस गुस्से और बेचैनी को समझिए

दलितों के इस गुस्से और बेचैनी को समझिए

एक अप्रैल को जब यह खबर आई थी कि दलित संगठन एससी/एसटी ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट के बदलाव के खिलाफ ‘भारत बंद’ करेंगे तो शायद ही किसी ने इसे गंभीरता से लिया होगा। सच तो यह है कि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं चला कि दो अप्रैल को ‘भारत बंद’ भी है। देश […]

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 नोटबंदी का मारा होटल मालिक करोड़ों का क़र्ज़ लेकर फ़रार

नोटबंदी का मारा होटल मालिक करोड़ों का क़र्ज़ लेकर फ़रार

क्या आप इस पर यकीन कर सकते हैं कि जिस आदमी का शहर में फोर रेटिंग का आलीशान होटल हो, शहर की पॉश कालोनी में शानदार कोठी हो, जिसके पोर्च में कई महंगी लग्जरी गाड़ियां खड़ी हों, खानदानी रईस हो, वह नोटबंदी के चलते इतना कर्जदार हो जाए कि परिवार समेत शहर छोड़कर भाग जाए? […]

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 तिरंगा और भगवा का घातक घालमेल

तिरंगा और भगवा का घातक घालमेल

कासगंज का दंगा उस दिन हुआ, जब देश गणतंत्र दिवस मना रहा था। इसे हिंदू भी मना रहे थे, तो मुसलमान भी पीछे नहीं थे। लेकिन इस पर भी सांप्रदायिकता का रंग चढ़ा दिया गया। अभी ठीक ठीक किसी को नहीं मालूम कि दंगा क्यों भड़का? आरोप प्रत्यारोपों का दौर जारी है। लेकिन इस हकीकत […]

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