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भारत-पाक रिश्तों को मज़बूती देते हुए, ननकाना साहिब पहुंचे सिख श्रृद्धालू

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भारत और पाकिस्तान के बीच कुछ कड़ियाँ हैं, जो इन दोनों पड़ोसियों को जोड़े रखती हैं, आज़ादी के बाद दो अलग-अलग मुल्कों में बंट चुकी पंजाब की ज़मीन में इस वक़्त गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व की धूम है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मौजूद गुरुनानक देव की जन्मस्थली ननकाना साहिब के लिए दुनिया भर से सिख श्रृद्धालुओं का जाना प्रारंभ हो चुका है.
इसी कड़ी में भारत से भी श्रद्धालुओं जत्था पाकिस्तान जा चुका है. भारत से 846 सिख श्रद्धालुओं का जत्था गुरुवार को अमृतसर से श्री ननकाना साहिब के लिए तीन स्पेशलट्रेनों में रवाना हुआ. एसजीपीसी सचिव डा रूप सिंह के अनुसार, पाकिस्तान में सिखों के ऐतिहासिक और धार्मिक गुरुद्वारा साहिबान सुशोभित हैं और हर सिख उन गुरूधामों के दर्शन करना चाहता है. इसलिए सरकार को चाहिए कि अधिक से अधिक सिख श्रद्धालुओं को वीजा जारी किये जाएं.

गुरुद्वारा पंजा साहिब – ननकाना साहिब पंजाब (पाकिस्तान)


शिरोमणि कमेटी के सचिव डा. रूप सिंह ने कहा कि हर साल की तरह श्री गुरू नानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाने के लिए एसजीपीसी द्वारा सिख श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान में भेजा गया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार व पाकिस्तान एंबेसी को भेजे 880 श्रद्धालुओं के पासपोर्ट में 846 वीजे प्रदान किए गए थे, जबकि 34 श्रद्धालुओं को वीजा नहीं दिया गया.
उन्होंने कहा कि गुरूद्वारा जन्म स्थान ननकाना साहिब के लिए धार्मिक लिटरेचर के अलावा 750 थालिया, 750 ग्लास, 750 कोलियां, सैंचिया साहिब के सैट, गुटका नितनेत साहिब के 200 तथा गुटका साहिब 100 भेजे गए हैं.
दोनों देशों की भाषाएं, बोलचाल और रहन सहन के अलावा गुरुद्वारा ननकाना साहिब भी एक कॉमन फैक्ट है, जो दोनों देशों को तनाव से हटकर दोस्ताना माहौल में जीने की एक वजह देता है. भारत और पाकिस्तान जो कि आज़ादी के बाद से ही तरह -तरह के आपसी विवादों में उलझे रहे हैं. उनके बीच ननकाना साहिब तीर्थ संबंध सुधारने की एक वजह बन सकती है.
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