यौन शोषण के आरोपों से घिरे पूर्व विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. मी टू कैंपेन के तहत उन पर 10 दिन में 16 महिलाएं यौन शोषण के आरोप लगा चुकी हैं.

रविवार को एम जे अकबर नाइजीरिया दौरे से लौटे थे, तब से इस्तीफा देने तक 72 घंटे में वे चार केंद्रीय मंत्रियों – अरुण जेटली, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह से मिले थे. इसके बाद बुधवार की सुबह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से उनकी मीटिंग हुई. बताया जा रहा है एनएसए से बातचीत में ही मंत्री पद छोड़ना तय हुआ.

इससे पूर्व एम जे अकबर ने आरोप लगाने वाली पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में मानहानि का मुकदमा किया है. इस पर होने वाली सुनवाई में 20 महिलाएं उनके खिलाफ गुरुवार को पटियाला हाउस कोर्ट में गवाही देने के लिए तैयार हैं.

अकबर समेत सरकार की तरफ से इस मसले पर अब तक ख़ामोशी बरती गई थी. हालांकि मुकदमे और बयान में अकबर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया था. लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोग सरकार पर अकबर से इस्तीफ़ा लेने का दबाव बना रहे थे. बुधवार शाम को अकबर ने एक बयान जारी कर इस्तीफ़ा दे दिया.

11 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने #MeToo अभियान का समर्थन किया. अपने ट्विटर अकाउंट पर फ़ेसबुक की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास की पोस्ट शेयर करते हुए अपना समर्थन ज़ाहिर किया.

दास ने अपने पोस्ट में कहा था, “आपको किसी पीड़ित महिला पत्रकार का समर्थन करने के लिए मी टू अभियान की आवश्यकता नहीं है. न आपको महिला होने की आवश्यकता है. आपको महज सही और गलत को समझने की आवश्यकता है. संवेदनशील होने की ज़रूरत है.”

एमजे अकबर के वकीलों का कहना है

कि आरोप लगाने वाली प्रिया रमानी ने खुद माना है कि 20 साल पुराने इस मामले में अकबर ने उनके साथ कुछ नहीं किया था. प्रिया ने अकबर पर आरोप लगाने वाले लेख से पहले कभी कहीं किसी अथॉरिटी के पास शिकायत नहीं की. अकबर के ख़िलाफ़ जिस कथित घटना को लेकर आरोप लगाए गए हैं, वो सिर्फ़ इस लेख पर आधारित हैं. ये लेख प्रिया की कल्पनाओं पर आधारित है.

एमजे अकबर की ओर से ये कहा गया

कि झूठे आरोप लगाकर राजनीतिक बिरादरी, मीडिया, दोस्तों, परिवार और समाज में उनकी छवि को नुकसान हुआ है. इन आरोपों के बाद अकबर को दोस्तों, परिवार, राजनीति और मीडिया से काफ़ी फ़ोन किए गए. इन फ़ोन कॉल्स में झूठे आरोपों को लेकर सवाल किए गए. इन आरोपों से अकबर की छवि को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नहीं हो सकती.

एम जे अकबर के इस्तीफ़े पर सोशल मीडिया कि प्रतिक्रिया

अकबर के खिलाफ सबसे पहले आरोप लगाने वाली और मानहानि के मुकदमे का सामना कर रहीं पत्रकार प्रिया रमानी ने अकबर के इस्तीफे के बाद कहा, “उनके रुख की पुष्टि हुई.”

रमानी ने ट्वीट किया, “एक महिला के तौर पर, एम.जे. अकबर के इस्तीफे से हम सही साबित हुए हैं. मैं उस दिन की ओर देख रही हूं, जब मुझे अदालत से भी न्याय मिलेगा.”

अकबर को ‘हिंसक’ करार देने वाली पत्रकार सबा नकवी ने कहा, “महाअष्टमी पर देवी दुर्गा ने राक्षस का खात्मा किया, एमजेअकबर गए..”