अर्थव्यवस्था

बैड लोन्स (ऋण न चुकाने) के मामले में विश्व में नंबर 1 हुआ भारत

बैड लोन्स (ऋण न चुकाने) के मामले में विश्व में नंबर 1 हुआ भारत

मोदी जी ने ओर किसी बात में देश को न.1 पर पुहचाया हो या न हो, पर उन्होंने एक बात जरूर देश को न.1 कर दिया है. विश्व की 10 आर्थिक ताकतों में भारत बैड लोन्स ( Bad Loans ) के मामले में सबसे घटिया देशों की श्रेणी में नम्बर 1 पर हैं. इटली से भारत का तगड़ा मुकाबला था लेकिन अब भारत ने उसे भी पीछे छोड़ दिया है, इटली में जहां बैड लोन 9.9 फीसदी है, वहीं भारत में इसका प्रतिशत 10.3 पुहंच गया है.
भारत के बैंक बैड लोन की भयानक चपेट में है, हालत इतनी खराब है कि खुद केबिनेट मंत्री गडकरी ने बता रहे हैं कि सड़क निर्माण का ठेका लेनेवालों को बैंक लोन नहीं दे रहे हैं और न ही इन प्रॉजेक्ट्स को बैंक गारंटी ही दी जा रही है. इससे 2022 तक 84 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़क बनाने की योजना के अधर में पड़ गयी हैं.
दो साल पहले पता चला कि मात्र 57 लोगों के ऊपर 85 हज़ार करोड़ का कर्ज बकाया है. कोर्ट ने रिज़र्व बैंक से पूछा था कि आखिर इन लोगों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं कर दिए जाते? लेकिन रिजर्व बैंक ने मोदी सरकार के दबाव में आकर उनके नाम बताने से इनकार कर दिया.
एक संसदीय समिति ने बताया है मोदी सरकार के चार सालो में बैंको के नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) में 6.2 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. इनके शासनकाल में साल दर साल बैंको द्वारा बट्टे खाते में डाली जाने वाली रकम बढ़ती ही गयी! आखिर यह कैसे हुआ?
आप को जानकर आश्चर्य होगा कि पब्लिक सेक्‍टर बैंकों (पीएसयू) ने पिछले 5 साल के दौरान 2.5 लाख करोड़ रुपए का लोन राइट ऑफ किया है. कोई जरा पूछे कि यह किन लोगों के पैसे राइट ऑफ किये गए, यह कैसी चौकीदारी की आपने कि, आपके मित्र उद्योगपति पिछले दरवाजे से अपना लोन राइट ऑफ करवाते गए?
खुद को चौकीदार कहलाने वाले प्रधानमंत्री की सारी चौकीदारी यहाँ धरी की धरी रह जाती है, 2019 के आम चुनाव से पहले भारत की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के संदर्भ में देश के बैड लोन में नंबर वन हो जाने की बात बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन कोई विपक्षी दल मोदी को इस मुद्दे पर घेरने की कोशिश नही करता यही आश्चर्य है?

About Author

Gireesh Malviya

गिरीश मालवीय एक विख्यात पत्रकार हैं, जोकि आर्थिक क्षेत्र की खबरों में विशेष रूप से गहन रिसर्च करने के लिए जाने जाते हैं। साथ ही अन्य विषयों पर भी गिरीश रिसर्च से भरे लेख लिखते रहते हैं।