‘द वॉल’ और ‘मिस्‍टर डिपेंडेबल’. या यूं कहे टीम इंडिया के पूर्व कप्तान. टेस्ट और एकदिवसीय दोनों फॉर्मेट ने दस हजारी. इंडिया के पूर्व बल्लेबाज राहुल द्रविड़ का आज जन्मदिन है. आइए जानते हैं अपने गज़ब के डिफेन्स से गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले टीम इंडिया के इस महानतम बल्लेबाज के बारे में.
द्रविड़ भले ही क्रिकेट के”भगवान” तो नहीं रहे हो. पर, एक ऐसे साथी प्लेयर की तरह रहे जो जब भी टीम को जरूरत हुई तो वो ढाल बनकर खड़े हो जाते थे. ऑस्ट्रेलिया के महशूर गेंदबाज ब्रेट ली ने  द्रविड़ के बारे में कहा था कि ‘अगर आपको अपनी जिंदगी में राहुल जैसे लोगों से नहीं बनती है तो फिर आपके साथ गंभीर क्राइसिस है’.
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राहुल के हम टीम को किसी एक योगदान को लिखकर सीमित नहीं कर सकते क्योंकि इन्होनें जितना टीम को योगदान वो पूरा ही अतुलनीय है या अंग्रेजी में कहे कि ये पूरा ही अमेजिंग है. मेरी नजर में ये क्रिकेट के आमिर खान है. क्रिकेट के मिस्टर परफेक्ट. मेरे लिए द्रविड़ की क्रिकेट की अहमियता इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि जब मैं क्रिकेट का फैन बना था, तब कप्तानी द्रविड़ ही संभाल रहे थे.

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राहुल द्रविड़

शायद वो भारतीय क्रिकेट का सबसे मुश्किल दौर में था, क्योंकि तब टीम के पास अच्छे प्लेयर तो थे पर कोई अगुआई करने की हामी नहीं भर रहा था, उस समय द्रविड़ ने दिलगी दिखा टीम की अगूवाई की. तब टीम गांगुली और चेप्पल विवाद से भी उभर रही थी. धाकड़ बल्लेबाज और कप्तान गांगुली टीम से बहार किये जा चुके थे. इसी कारण उस समय राहुल को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था, पर राहुल ने अपनी प्रतिभा से आलोचकों को करारा जवाब दिया. हालांकि 2007 के वर्ल्डकप में द्रविड़ की टीम कुछ ख़ास नहीं कर पायी थी. पर उन्होंने टीम को पूरी तरह तरासा. और एक बहुत ही शानदार टीम धोनी के हाथों में थमाई थी. और इस टीम ने जो कमाल किये उसके तो सभी कायल है. राहुल हमेशा बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे है. टीम को जब जो जरुरत पड़ी राहुल ने वो किरदार निभाया सिवाय गेंदबाज के. राहुल स्लिप में बेहतरीन फील्डर भी रहे.
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राहुल की एक बात की हमेशा बात की चर्चा की जाती है, वो हद्द से ज्यादा ईमानदार और सादगी वाले रहे है. मैदान में भी और मैदान के बहार भी. पिछले दिनों एक फोटो वायरल हुई थी जिसमें वो पेरेंट्स मीटिंग में कतार में इंतज़ार करते नजर आये थे. आज के अय्याशी वाले समय में ये बेहतरीन है.
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फोटो क्रेडिट: इंडियन एक्सप्रेस

एक और किस्सा मेरे को कहीं पढ़ा हुआ याद आता है की एक बार किसी महिला पत्रकार ने राहुल के साथ ‘प्रेंक’ करना चाहा. वो द्रविड़ को अपने एक्सप्रेशन से रिझाने लगी, पर द्रविड़ तो द्रविड़ थे. कहाँ बातों में आने वाले थे. तभी तो कहा है ‘बहुत मुश्किल है द्रविड़ होना’.

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Ashok Pilania

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