मालदीव पर चीन का बढ़ता असर नज़र आने लगा है, मालदीव सरकार ने भारत को उसके देश से सैन्य हैलिकॉप्टर और लोगों को वापस बुलाने को कहा है. मीडिया रिपोर्टस के अनुसार मालदीव सरकार के इस फैसले के बाद भारत और चीन के बीच तनातनी बढ़ सकती है.

भारत बीते कई दशकों से मालदीव के साथ विभिन्न क्षेत्रों में साझेदार रहा है. कई मौकों में मालदीव में आये राजनीतिक संकटों में भारत ने मालदीव का साथ दिया है. पर हाल ही के दिनों में मालदीव में चीन का प्रभाव बढा है.

बताया जाता है, कि इसकी एक वजह चीन द्वारा मालदीव में किए जा रहे विकास कार्य भी हैं. चीन मालदीव में बड़े स्तर पर सड़के, ब्रिज और बड़े एयरपोर्ट बनाने में जुटा है.

ज्ञात हो कि कुछ समय पहले ही भारत ने मालदीव में यामीन सरकार की तरफ से राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ चलाए गए अभियान और आपातकाल का विरोध किया था. उस समय मालदीव के वर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल यामीन के विरोधियों ने भारत से सैन्य हस्तक्षेप तक की मांग की थी. ऐसा माना जा रहा है कि भारत के इस हस्तक्षेप के बाद ही मालदीव में भारत विरोधी माहौल तैयार हुआ.

भारत में मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद के अनुसार – भारत ने जो दो हेलिकॉप्टर दिए हैं उनका इस्तेमाल अब नहीं किया जा रहा है. उनके अनुसार अब मालदीव इन हेलिकॉप्टर द्वारा किए जाने वाले कामों को करने के लिए खुद सक्षम है.

हालांकि उनके अनुसार भारत और मालदीव अभी भी इस आइलैंड वाले देश के एक्सक्लूसिव इकनॉमिक जोन की सामूहिक निगरानी कर रहे हैं. भारत के दक्षिण पश्चिम में 400 किलोमीटर दूर का यह देश चीन और मिडल ईस्ट के बीच दुनिया के सबसे व्यस्त जहाजी मार्ग के काफी करीब है.

ज्ञात होकि मालदीव में भारत के हेलिकॉप्टर के अलावा 50 मिलिटरी पर्सनल भी तैनात हैं. इनमें पायलट और मेंटनेंस क्रू भी शामिल हैं जिनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई है. इसके बावजूद भारत ने उन्हें मालदीव से वापस नहीं बुलाया है.

अब देखना ये है कि मालदीव के साथ बिगड़ते रिश्ते और चीन की मालदीव में बढ़ती सक्रीयता के मद्देनज़र भारत सरकार क्या रणनीति और क़दम उठाती है. जिससे समुद्री परिवहन की निगरानी में नहं भूमिका निभाने वाले इस क्षेत्र में भारत की उपस्थिति बनी रहे.