विचार स्तम्भ

क्या कनाडा के प्रधानमंत्री को सम्मान नहीं दिया जा रहा है ?

क्या कनाडा के प्रधानमंत्री को सम्मान नहीं दिया जा रहा है ?

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विदेशी दौरे करते रहते है, इसी तरह भारत मे भी विदेशी नेताओं का आवागमन होता रहता है. पिछले कुछ दिनों में भारत के दौरे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इस्त्राएल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ,यूएई के क्राउन प्रिंस, जापान के शिंजो आबे शामिल आ चुके हैं, इसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए 17 फरवरी को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन द्रुडो 6 दिवसीय भारत दौरे पर आए हैं।

क्यों है औरों से अलग

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के भारत यात्रा को लेकर अलग माहौल बन गया है जिसका कारण है मोदी सरकार का उनके प्रति बर्ताव क्योंकि अन्य विदेशी नेताओं की तरह जस्टिन ट्रुडो को पर्याप्त तवज्जो नहीं दी जा रही, कनाडा के मीडिया में लिखा गया कि उनकी आगवानी करने खुद प्रधानमंत्री एयरपोर्ट नहीं गए। इस्राइल के प्रधानमंत्री और यूएई के क्राउन प्रिंस का पीएम ने खुद स्वागत किया था।
जबकि ट्रुडो का स्वागत करने के लिए जूनियर मंत्री को भेजा गया। जस्टिन अपने परिवार के साथ आगरा ताजमहल देखने गए तब वहां यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ वहां नही थे ,जबकि नेतन्याहू के आगरा पहुँचने पर वह मौजूद थे।
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सोमवार को जस्टिन मोदी के ग्रह राज्य गुजरात मे थे लेकिन वहाँ भी सरकार की तरफ से मेहमान नवाजी  के लिए कोई मौजूद नहीं रहा।
इससे पहले चीन,जापान इस्राइल के पीएम के साथ मोदी गुजरात गए थे। भारतीय मीडिया में भी ट्रुडो की भारत यात्रा को अधिक जगह नहीं दी जा रही है। अन्य विदेशी नेताओं के दौरे की हलचल को देखते हुए कनाडाई पीएम का यह दौरा काफी फीका दिखाई पड़ रहा  है।

क्या है वजह

ट्रुडो की बतौर कनाडाई प्रधानमंत्री यह पहली भारत यात्रा है, बताया जा रहा है कि खालिस्तान के प्रति ट्रुडो के नरम रुख के मद्देनजर सरकार उन्हें कड़ा संदेश देना चाहती है।
ट्रुडो ने कनाडा में खालसा डे परेड में हिस्सा लिया था, जिसमे खालिस्तान समर्थको के जुटने की खबरें आई थी। भारत के न चाहते हुए भी ट्रुडो उस इवेंट में गये थे। इसके अलावा भी कनाडा के 16 गुरुद्वारों ने भारतीय अधिकारियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी, ट्रुडो के साथ भारत आए मंत्रियों में दो ऐसे है जिन्हें खालिस्तान समर्थको का हमदर्द माना जाता है।
जस्टिन ट्रुडो के कैबिनेट में चार सिख मिनिस्टर है जिनका झुकाव खालिस्तान समर्थकों के प्रति होने की संभावना है हालांकि सरकारी तौर पर कनाडा के खालिस्तान समर्थक होने से इनकार किया गया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी भारत यात्रा को लेकर काफी सुस्त है उनकी और से सोशल मीडिया पर स्वागत का एक ट्वीट भी नही किया गया जबकि और विदेशी नेताओं के साथ ऐसा नहीं था।

भारत व कनाडा के संबंध

भारत और कनाडा के संबंध हमेशा करीबी व गर्मजोशी से भरे रहे है कनाडा में तकरीबन 12 लाख भारतीय रहते हैं। ऐसे में भारत से संबंधित मुद्दों पर कनाडा में रह रहे भारतीयों के बीच विचार विमर्श प्रतिक्रिया होती रहती है।
कनाडा में रह रहे सिखों के बीच खालिस्तान की मांग को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन जुटाया जा रहा है जिसको लेकर छोटी सभाएं कार्यक्रम भी किये जाते है।
जस्टिन ट्रुडो का खालिस्तान परेड में शामिल होना भारत मे खालिस्तान को लेकर संवेदनशीलता से पूरी तरह परिचित न होना दर्शाता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत व कनाडा के रिश्तों में कोई गिरावट नहीं आई है। पीएम के एयरपोर्ट न जाने को लेकर कहा गया है कि पीएम अपवाद के तौर पर ही प्रोटोकॉल तोड़ते है वह हर विदेशी नेता के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में नहीं जाते।
जस्टिन ट्रुडो भारत के सम्मनित अतिथि है और दोनों देशों के बीच रिश्तो को आगे बढ़ाने के लिए काफी मेहनत की गई है,लेकिन यह सच है कि खालिस्तान का मुद्दा भारत व कनाडा के रिश्तों बीच आता रहा है जो निराशाजनक है।

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Ankita Chauhan

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