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जानिये हिटलर के बदनाम 'नूरेम्बर्ग क़ानून' के बारे में

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15 सितंबर 1935 के दिन न्यूरेम्बर्ग कानून बनाकर जर्मन यहूदियों को जर्मन नागरिकता से वंचित कर दिया गया था और उल्टे स्वस्तिक को नाजी जर्मनी का आधिकारिक प्रतीक बना दिया गया था !
न्यूरेम्बर्ग शहर में हुई नाजी पार्टी की वार्षिक रैली में ये यहूदी विरोधी न्यूरेम्बर्ग कानून पेश किया गया, 1933 में हिटलर के सत्ता में आने के बाद नाजीवाद जर्मनी की सरकारी विचारधारा बन गया और यहूदियों को व्यवस्थित और सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया!
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बाद में रेस्टोरेशन ऑफ प्रोफेशनल सिविल सर्विसेज नाम का एक कानून बना, जिसके तहत गैर आर्यों को सिविल सर्विस में आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इस कानून के कारण नाजियों के राजनीतिक प्रतिद्ंवद्वियों के सिविल सर्विस में आने से रोक लग गई!
न्यूरेम्बर्ग कानून के तहत चार जर्मन दादा-दादियों वाले लोगों को जर्मन माना गया, लेकिन जिनके तीन या चार दादा-दादी यहूदी थे, उन्हें यहूदी माना गया. एक या दो यहूदी दादा-दादी वाले लोगों को मिश्रित खून वाला वर्णसंकर कहा जाता था!
इस तरह के कानूनों ने यहूदियों से जर्मन नागरिकता तो छीन ही ली, यहूदियों और जर्मनों के बीच शादी पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया, इसे लव जेहाद की तरह समझ सकते हैं, शुरुआत में तो यह कानून सिर्फ यहूदियों के लिए ही बने थे लेकिन बाद में इन्हें जिप्सियों या बंजारों और अश्वेतों पर भी लागू कर दिया गया!

न्यूरेम्बर्ग कानून लागू होने के साथ ही जर्मनी में

  • यहूदी व्यवसायों का बहिष्कार शुरू हो गया था.
  • यहूदी जर्मनी के स्कूलों में या यूनिवर्सिटीज में न पढ़ा सकते थे, ना ही पढ़ सकते थे.
  • यहूदी सरकारी नौकरियों से वंचित कर दिए गए थे.
  • यहूदियों के वकालत और डाक्टरी पेशे पर रोक लगा दी गयी.
  • यहूदी किताबें प्रकाशित नहीं कर सकते थे.
  • यहूदी सिनेमा, थिएटर्स और वेकेशन रिसॉर्ट्स का आनंद नहीं ले सकते थे.
  • 1937 तक नाज़ियों ने यहूदियों के व्यापर धंधों को ज़ब्त करना शुरू कर दिया था.
  • इसके चलते कई नामी जर्मन यहूदी देश से भाग गए थे, जिसमें अल्बर्ट आइंस्टीन भी थे.

Source :-
https://en.wikipedia.org/wiki/Nuremberg_Laws
http://slideplayer.com/slide/6430979/
https://www.ushmm.org/outreach/en/article.php…