December 4, 2021
राजनीति

क्या भाजपा, फेसबुक के ज़रिए नफरत फैलाने का काम कर रही है ?

क्या भाजपा, फेसबुक के ज़रिए नफरत फैलाने का काम कर रही है ?

कोंग्रेस प्रवक्ता और कोंग्रेस पार्टी (congress parti) के सोशल मीडिया प्रभारी रोहन गुप्ता (Rohan gupta) ने शुक्रवार (12 november) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कॉन्फ्रेंस all india congress committee (AICC) के हेड क्वार्टर में आयोजित की गई थी। कॉन्फ्रेंस में रोहन गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फ़ेसबूक को आड़े हाथ लिया। कहा कि भारत मे फेसबुक bjP के लिए नफरत फैलाने का हथियार बन गया है।

बीते तीन सालों में फ़ेसबूक (facebook) की आंतरिक टीम की तरफ से जारी आंतरिक रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, भारत मे 2018 के बाद से ‘हेट स्पीच’ और ‘परेशान करने वाली सामग्री’ बढ़ी है। जिनमे ‘ध्रुवीकरण की सामग्री’, ‘फेक और अप्रामाणिक न्यूज़’ के साथ साथ ‘अल्पसंख्यक समुदाय को बदनाम करने वाला कंटेंट’ शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला :

भारत मे 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले फेसबुक की आंतरिक टीम की तरफ़ से दो रिपोर्ट पेश की गई थी। जिनमे कहा गया था भारत में फेसबुक पर ‘हेट स्पीच’ और ‘परेशान करने वाली सामग्री’ की भरमार है। वहीं तीसरी रिपोर्ट अगस्त 2020 में सामने आई जिसमे कहा गया फेसबुक का एआई टूल स्थानीय भाषा की पहचान न कर सका। लेकिन ये एआई टूल है क्या?

दरअसल, एआई टूल फ़ेसबूक का एक मेकेनिज़्म है जो ऐसी किसी भी सामग्री की पहचान कर लेता है जो समस्याग्रस्त हो या नफरत फैलाने वाली है। भले ही सामग्री किसी भी भाषा में हो। अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने इस मुद्दे को मुखरता से छापा है।


फेसबुक नफरत फैलाने के लिए भाजपा का हथियार बन गया है ?

BBC के मुताबिक, “एडवर्सेरियल हार्मफुल नेटवर्क्स: इंडिया केस स्टडी” नाम की फेसबुक की पहली आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया है कि, पश्चिम बंगाल में फेसबुक पर 40 फीसदी व्यू पोर्ट व्यूज़ उन पोस्ट पर मिले है, जो फेक या अप्रामाणिक है। व्यू पोर्ट व्यूज़ एक तरीका है ये जानने का की, फेसबुक पर किसी पोस्ट को कितने लोगों ने देखा है।

कुछ महीनों पहले फ़ेसबुक की पूर्व कर्मचारी व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस होगेन और उनके वकील ने अमेरिकी कोंग्रेस और एसईसी ( संयुक्त राज्य प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ) के सामने दस्तावेजो से जुड़ी गंभीर बातें रखी थी। जिसमे उन्होंने खुलासा किया कि, फ़ेसबूक पूरी तरह से भारत मे गलत जानकारी, भ्रम वाली सामग्री और किसी विशेष समुदाय को बदनाम करने वाले कंटेंट को रोकने में असफल रहा है।


हालांकि, 2019 में फ़ेसबूक के तत्कालीन अध्यक्ष क्रिस कॉक्स ने एक आंतरिक बैठक में कहा था कि “इन मुद्दों से जुड़ी सामग्री, अन्य सामग्री की तुलना में विस्तृत नहीं है।” मालूम हो कि कॉक्स ने मार्च 2019 में फेसबुक छोड़ दिया था और 2020 में बतौर चीफ़ प्रोडक्ट ऑफिसर फेसबुक वापस जॉइन किया था।

फ़ेसबूक से की स्वतंत्र जांच की मांग :

कोंग्रेस के सोशल मीडिया हेड रोहन गुप्ता ने कॉन्फ्रेंस में रिपोर्ट का हवाला देते हुए कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि फेसबुक कंटेंट आइडेंटिफिकेशन के लिए 87 फीसदी बजट रखती है। लेकिन ये बजट सिर्फ 9 फीसदी अंग्रेज़ी कंटेंट के लिए यूज़ किया जा रहा था। 2019 में इसमें भी 15 फीसदी की कटौती की गई। 2019 में फेंक न्यूज़ और हेट स्पीच 40 फीसदी बढ़ा, और दिसम्बर 2019 में ये आंकड़ा 80 फीसदी हो गया।

फ़ेसबूक ने अपने ही कर्मचारियों की रिपोर्ट्स को नजरअंदाज किया, उन पर न एक्शन लिया और न ही अपनी गलतियों को स्वीकार किया। रोहन गुप्ता कहते हैं, की भारत मे 37 करोड़ लोग फ़ेसबूक यूज़ करते हैं जो फ़ेसबूक के लिए एक बहुत बड़ा बाजार है। ऐसे में अपनी ही रिपोर्ट्स को नजरअंदाज करना संयोग नहीं है, ये बीजेपी का प्रयोग है।

हम फ़ेसबूक से मांग करते हैं कि मामले की स्वतंत्र जांच की जाए। दो सालों में पूर्व कर्मचारियों की जारी रिपोट्स को संज्ञान में लिया जाए, उन पर अमल किया जाए। फ़ेसबूक बताए कि उसने कॉन्टेंट आइडेंटिफिकेशन के बजट को कम क्यों किया ? रिपोट्स को नजरअंदाज क्यों किया, इसकी सही से जांच क्यों नहीं कि गयी। इसके लिए सही ज़िम्मेदार को सामने लाना चाहिए।

BJP तथ्यों को तोड़ने का काम करती है :

एक पत्रकार बंधु के सवाल का जवाब देते हुए रोहन ने कहा, की भाजपा की मजबूरी बन गयी है तथ्यों को तोड़ना। अपनी दुकान चलाने के लिए, और अपनी विफलता छुपाने को जनता समझ रही है। तथ्यों को तोड़ कर भाजपा अपनी विफलताओं को नहीं छिपा सकती। भाजपा नहीं छिपा पाएगी की पेट्रोल और डिज़ल के दाम 100 के पार है, महिला उत्पीड़न के मामले उन की सरकार में सबसे ज़्यादा है।

देश को भ्रष्टाचार की आग में झोंकने का काम सबसे ज़्यादा भाजपा ने किया है, भाजपा नहीं छिपा पाएगी की देश की संपत्ति को कौड़ियों के दाम बेचा जा रहा है। भाजपा अपनी सत्ता बचाने और राजनीति को चमकाने के लिए फ़ेसबूक का प्रयोग कर रही है। कमल खिलाने के लिए फ़ेसबूक कीचड़ का काम कर रहा है।

About Author

Sushma Tomar