इंस्पायरेशनल स्टोरी

इंस्पायरेशनल स्टोरी – पिता की है सब्ज़ी की दुकान, बेटे ने जीता स्वर्ण पदक

इंस्पायरेशनल स्टोरी – पिता की है सब्ज़ी की दुकान, बेटे ने जीता स्वर्ण पदक

वाराणसी  – गरीबी बदहाली को मात देकर सब्जी बेचने वाले के बेटे ने नया मुकाम हासिल किया है, कामयाबी की शानदार हिस्ट्री लिखी…”गले में गोल्ड मेडल डालकर घर पहुंचे तो परिवार खुशी से झूम उठा लोगों ने भी इस बेटे का शानदार स्वागत किया। विशाल की शानदार कामयाबी के लिए उसे सम्मानित करने और नगद पुरस्कार, सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई।”
विशाल जब घर लौटे तो गले में मेडल देखकर पिता ने बेटे का माथा चूम लिया मां की आंखों में आंसू बह निकले दोनो भाई खुशी से झूम उठे । बुल्गारिया में आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय यूथ एंड बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक विजेता मोहनसराय क्षेत्र के कनेरी गांव निवासी बॉक्सिंग खिलाड़ी विशाल गुप्ता के वाराणसी पहुंचने पर ग्रामीणों सामाजिक संगठनों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

विशाल ने कजाकिस्‍तान के रोमन डेयर को हराकर जीता स्‍वर्ण पदक

पहली बार अंतरराष्‍ट्रीय टूर्नामेंट में उतरे विशाल गुप्ता ने 2 अप्रैल को मेजबान देश के स्‍टोव जार्जी को 5-0 से हराकर हरा कर अपना रजत पक्का कर लिया था। इसके बाद बीते शुक्रवार को हुए फाइनल में विशाल ने कजाकिस्तान के रोमन डेयर को हराकर स्‍वर्ण पदक जीत लिया। विशाल ने 2015 से 2018 तक सिगरा स्‍टेडियम में दिलीप सिंह से मुक्‍केबाजी की कोचिंग ली थी।

आर्थिक स्थिति नहीं है ठीक

विशाल के माता पिता और भाइयों ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके बावजूद चार वर्ष पहले विशाल ने पढ़ाई के साथ बॉक्सिंग को चुना सिगरा स्टेडियम में विशाल को पूरी सुविधाएं मिली और उसका खेल निखरा। देश भर में कई मुकाबला जीतने के बाद पहली बार उसका चयन बुल्गारिया में इंटरनेशनल यूथ बॉक्सिंग कंपटीशन में जाने वाली टीम में चयन हुआ।
हालात कुछ ऐसे थे कि जरूरी डाइट तक के लाले पड़ जाते थे। यकीनन अपने ख्वाब बेटे विशाल की जीत बन गया और उन्होंने अपना एकमात्र लक्ष्य देश के लिए मेडल जीतना बना लिया। गरीबी अभी भी अड़चन पैदा कर रही थी और पिता के पास अपने बाक्सर बेटे को स्टेडियम प्रैक्टिस करने जाने के लिए पैसे नहीं होते थे बेटे की रुचि देखकर बस के बजाय साइकिल से चलने का फैसला किया ताकि बेटे की लाइफ को बेहतर किया जा सके। इस बदहाली के दौर से गुजरने के बावजूद विशाल ने अपने हौसले को पस्त नहीं होने दिया।

पिता चलाते है सब्जी की दुकान

विशाल के पिताजी श्यामधर गुप्ता मोहन सराय चौराहे पर सब्जी की दुकान चलाते है। विशाल ने अपनी इस जीत का श्रेय अपने माता पिता को दिया। उन्होंने बताया कि, ‘उनकी सफलता के पीछे उनके माता पिता का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने उनकी सफलता के लिए बहुत बड़ा त्याग किया है। साथ ही विशाल ने अपनी जीत का श्रेय अपने कोच दिलीप सिंह को भी दिया।’

रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार ने विशाल के आवास पर देखा कि 4 कमरों के मकान में बिना किसी सरकारी सुविधाओं से यह परिवार गरीबी से जद्दोजहद करके बेटे विशाल की प्रतिभा निखारने के लिए हर तरह से मदद सहयोग देने के लिए खड़े थे। सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने मांग रखा है कि विशाल के परिवार को राशन कार्ड सरकारी आवास शौचालय सहित विशाल को सरकारी नौकरी और नगद सहायता दिया जाए। स्वागत करने वालों में विजय बहादुर, आलोक चौबे, शिव कुमार गुप्ता, श्याम पांडे, संदीप, आकाश, सुनील, ओम प्रकाश आदि लोग रहे।

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Rizvana Tabassum