रॉबर्ट वाड्रा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा और डीएलएफ की ज़मीन खरीद में कथित सांठगांठ की FIR किसी सरकारी एजेंसी ने नहीं बल्कि एक निजी व्यक्ति की शिकायत पर आधारित है जिसका इस लेन देन से कोई सीधा ताल्लुक है ही नहीं है और न ही वो किसी सरकारी फाइल को देख सकता है.

शिकायतकर्ता सुरेन्द्र शर्मा हरियाणा के नूह जिले के राठीवास गांव का रहने वाला है और गुड़गांव में एक मेडिकल स्टोर चलाता है. सुरेन्द्र शर्मा की शिकायत पर खेड़कीदौला थाने का दरोगा जांच करेगा जिसमे ज़मीन की खरीद फरोख्त, ज़मीन को खेतिहर से कमर्शियल में परिवर्तन, कंपनियों का बनना, लोन और दूसरे पेचीदा मामले हैं. मतलब वक़्त रहते सब रफा दफा हो जायेगा.

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ढींगरा कमीशन की जांच रिपोर्ट गई रद्दी की टोकरी में. हरियाणा काडर के आईएएस अधिकारी, अशोक खेमका के ट्वीट (तस्वीर) से अंदाज़ा लग सकता है कि सरकार इस मामले को लेकर कितना गंभीर है. अशोक खेमका वही अफसर हैं जिन्होने इस मामले की शुरुआती जांच की थी और तबादलों की मार झेली थी.

जांच की जगह जांच का दिखावा कोई नया मास्टरस्ट्रोक है क्या?