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पहले पुलिस की मार और फिर कीटनाशक खाने वाले गुना के दलित दंपति पर दर्ज हुई FIR

मध्यप्रदेश – गुना के इस दलित दंपति की मारपीट का यह वीडियो आपने देखा होगा, तस्वीरें और वीडियो देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। अपने पिता से लिपटकार रोते इन बच्चों को देखकर यदि आपके दिल से आह नहीं निकली तो आपका दिल, दिल नहीं पत्थर है।

घटना का विवरण आपके लिए जानना ज़रूरी है। हुआ कुछ यूं कि गुना के जगनपुर चक स्थित एक सरकारी ज़मीन में गब्बू पारधी नामक व्यक्ति का कई दिनों से कब्ज़ा था। पर उसके पास उक्त ज़मीन का पट्टा नहीं था। इसलिए 2019 में उक्त ज़मीन को प्रशासन ने अपने क़ब्ज़े में ले लिया था। जिसे साईंस कालेज के लिए आवंटित कार दिया गया था। पर गब्बू पारधी ने उक्त ज़मीन को एक अधिया ( बटियादारी ) में राजकुमार अहिरवार को दे दिया था। राजकुमार ने 2 लाख रुपये क़र्ज़ लेकर खेती शुरू की थी।

अब जब पुलिस अतिक्रमण हटाने आई, तब राजकुमार और उसके परिवार ने आग्रह किया कि खड़ी फ़सल न बर्बाद की जाए। पर पुलिस ने एक न सुनी और जब राजकुमार के परिवार ने विरोध जताया तब उसके साथ मारपीट हुई। जिसके बाद किसान दंपति ने कीटनाशक पी लिया और उनकी मृत्यु हो गई। माता पिता की बॉडी से लिपटकर रोते बच्चों की मार्मिक तस्वीर आपने देखी होगी ।

पुलिस द्वारा मारपीट का वीडियो सोशलमीडिया में वायरल हो गया है। जिसके बाद मध्यप्रदेश सरकार पर दबाव बढ़ गया और गुना कलेक्टर और एसपी का ट्रांसफर कर दिया गया। पर लोगों का कहना है, कि ट्रांसफर से मृत किसान को इंसाफ नहीं मिल जायेगा ।

15 जुलाई को ज़हर खाने वाली दंपति और उसके भाई शिशुपाल अहिरवार सहित 8 लोगों पर गुना पुलिस द्वारा FIR दर्ज कर ली गई है। अब सवाल ये उठता है कि एक ज़मीन से क़ब्ज़ा हटाते समय क्या मानवीय मूल्यों का ध्यान नहीं रखना चाहिए। क्या उस दंपति के आग्रह को सुना नहीं जाना चाहिए था, क्या फ़सल काटने के बाद ज़मीन प्रशासन के क़ब्ज़े में नहीं ली जा सकती थी। यह सवाल सोशल मीडिया में आमजन द्वारा उठाए जा रहे हैं।