दिल्ली हिंसा पर सुनवाई करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस एस. मुरलीधर का रातों-रात तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर कर दिया गया है। जस्टिस एस. मुरलीधर ने अपनी सुनवाई के दौरान भकड़ाऊ बयान देने वाले बीजेपी नेताओं पर FIR दर्ज करने की बात कही थी और दिल्ली पुलिस को भी जमकर लताड़ लगाई थी।

हालांकि सुप्रीम कॉलिजियम ने बीती 12 फरवरी को जस्टिस मुरलीधर के तबादले को लेकर सुझाव दिया था, लेकिन इस आदेश में उसने तीन जजों के तबादले के आदेश दिए थे। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मोदी सरकार के विधि मंत्रालय ने अपने कल के आदेश में केवल 1 जज जस्टिस मुरलीधर का ही रातोरात तबादला सुनिश्चित किया है। यह बेहद चौकाने वाला निर्णय है।

एक ओर महत्वपूर्ण बात है कि तबादला का लेटर फरवरी 18 को पब्लिक डोमेन में आया था। कायदे से 14 दिनों का नोटिस पीरियड जस्टिस मुरलीधर को मिलना चाहिए वह भी उन्हें नही दिया गया।

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दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिशन शुरू से इस निर्णय का विरोध कर रहा है, एसोसिएशन ने तबादले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था, कि ऐसे तबादले न केवल हमारे संस्थाओं के लिए हानिकारक हैं, बल्कि आम आदमी का व्यवस्था से विश्वास उठाने जैसा है। एसोसिएशन में पेश प्रस्ताव में कहा गया था कि हमें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम अपने फैसले पर दोबारा से विचार करेगी।

ऐसी घटना विरले ही देखी जाती है, कि जब राज्य का बार एसोसिएशन किसी जज के तबादले पर इस तरह से खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराए। दरअसल कोलेजियम ने यह निर्णय लेते वक्त एक बार भी बार एसोसिएशन से उसकी राय जानना जरूरी नही समझा, इसलिए भी बार एसोसिएशन इस निर्णय से नाराज है।

जस्टिस मुरलीधर की छवि बेहतर व ईमानदार जज की रही है। दिल्ली हिंसा के मामले में उन्होंने तुरंत संज्ञान लेते हुए आधी रात को कोर्ट बैठा दी थी। दरअसल दो दिन पहले उस रात दिल्ली की स्थिति बेहद संगीन थी अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प वापस लौट चुके थे और जैसा कि कपिल मिश्रा ने अपने भाषण में दावा किया था, कि ट्रम्प के जाते ही एक्शन होगा वैसे ही तैयारी की जा रही थी। खबर आयी थी कि दंगाई उन छोटे अस्पतालों से निकलने वाली सड़को पर घात लगाए बैठे हैं। जहाँ से घायलों को बड़े अस्पताल ले जाया जाना है।

बीबीसी की खबर है कि मुस्तफ़ाबाद इलाक़े में स्थित अल-हिंद अस्पताल चलाने वाले डॉ. अनवर ने कहा कि अस्पताल में कई मरीज़ गंभीर स्थिति में पहुंचाए गए हैं। घायलों की भीड़ बढ़ती जा रही थी, लेकिन उन्हें बड़े अस्पताल में पहुंचाने के लिए कोई एंबुलेंस अस्पताल तक नहीं पहुंच सकी थी। क्योंकि बड़ी संख्या में अस्पताल के बाहर लोग एकत्र हो गए थे। यह पूरा गुजरात मॉडल था। जस्टिस मुरलीधर ने तुरन्त रात के साढ़े बारह बजे दिल्ली पुलिस को आदेश दिया कि अल-हिंद अस्पताल में मौजूद घायलों को ज़रूरी इलाज़ दिलाने के लिए रास्ता सुरक्षित कराया जाए। शायद यही डिसीजन सरकार को सबसे नागवार गुजरा।

अगली दोपहर को उन्होंने जब बीजेपी नेताओं पर FIR की बात की, तो पानी सर के ऊपर से गुजरने लगा। लिहाजा ताबड़तोड़ ढंग से मुरलीधर को केस से हटाने के लिए तत्काल प्रभाव से उनका रातों रात तबादला कर दिया गया।

चूंकि दिल्ली के चीफ जस्टिस छुट्टियों पर थे और उनकी जगह मुरलीधर यह मामला देख रहे थे, इसलिए अब चीफ जस्टिस धीरुभाई नारणभाई पटेल आज इस केस पर कार्यवाही का संचालन करेंगे आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि जस्टिस धीरुभाई नारणभाई पटेल वैसे तो झारखंड न्यायालय से प्रमोट होकर दिल्ली के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने हैं। लेकिन उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत 1984 से गुजरात हाई कोर्ट में वकालत से की थी और वर्ष 2004 में वे गुजरात हाई कोर्ट में जज बने थे। आगे आप खुद ही समझदार है!….. इस सुनवाई में क्या होगा खुद ही समझ लीजिए….