मोदी अपने चहेते और सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को सीबीआई प्रमुख नहीं बना पायेंगे. सीबीआई द्वारा अपने ही दूसरे नंबर के अधिकारी के खिलाफ घूसखोरी कांड की एफआईआर में मुख्य अभियुक्त बनाने के बाद ये लगभग तय हो गया है.

सीबीआई के मौजूदा प्रमुख आलोक वर्मा अगले साल जनवरी में अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं. राकेश अस्थाना सीबीआई में रहते हुये गुजरात मॉडल के ही नट-बोल्ट थे और एजेंसी के अंदर और बाहर तमाम विरोध के बावजूद मोदी सरकार ने इन्हे सीबीआई में स्पेशल डायरेक्टर नियुक्त कर दिया था. विपक्ष ने नेताओं की सुपारी अस्थाना की देखरेख में सीबीआई को दी जा रही थी. उस नियक्ति के वक़्त भी प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट गए थे पर अदालत ने हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था.

अस्थाना के ऊपर भ्रष्टाचार के छह मामले सीबीआई में चल रहे हैं जिस संस्थान में वो दूसरे नंबर के अधिकारी हैं इनमे सन्देसरा ग्रुप और सहारा के उपेंद्र राय से जुड़े घूस के मामले भी हैं. इसमे सबसे प्रमुख मीट कारोबारी मोईन कुरेशी घूस कांड है जिसमे अस्थाना के खिलाफ पुख्ता सुबूत पाये गए हैं. इसी केस में RAW के एक बड़े अधिकारी एसके गोयल का भी नाम आया है जिनकी कई मुलाकाते कुरेशी के गल्फ के देशों में हुई और वो कुरेशी के खिलाफ केसों को दबाने का काम का रहे थे. सीबीआई ने फिलहाल गोयल को अभियुक्त नहीं बनाया है.

ये भी नरेंद्र मोदी की चौकीदारी की नायाब मिसाल है.

सीबीआई प्रमुख चुनने की कमेटी में प्रधानमंत्री के अलावा नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस होते हैं. मौजूदा लोकसभा में कोई आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष नहीं है पर कांग्रेस के सदन में नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस कमेटी में रहेंगे. इसकी संभावना नगण्य है कि जस्टिस गोगोई अस्थाना को सीबीआई का प्रमुख बनाने के किसी प्रस्ताव को मंजूरी देंगे. कांग्रेस तो खैर विरोध करेगी ही.

चुनाव के कुछ महीने पहले मोदी-शाह की जोड़ी की अपने चहेते अफसर, अस्थाना को सीबीआई का प्रमुख बना कर विपक्ष के नेताओं को डराने धमकाने, भ्रष्टाचार के मुकदमों में फंसा कर अपना राजनीतिक हित साधने की योजना रही होगी जो अब खटाई में पड़ती दिख रही है.