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जब एक पिता ने माफ़ किया अपने बेटे के हत्यारों को

जब एक पिता ने माफ़ किया अपने बेटे के हत्यारों को

अबुधाबी में पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद रियाज़ झगड़े में मारे गए थे. फ़रहान मोहम्मद रियाज़ के पिता हैं जो सज़ा पाने वाले युवकों को माफ़ करने के लिए अपने परिवार और कुछ दोस्तों के साथ पेशावर से अबू धाबी की कोर्ट पहुंचे. ज्ञात होकि पाकिस्तानी नागरिक मुहम्मद रियाज़ के हत्या के दसों आरोपी भारतीय नागरिक हैं. जिन्हें अबुधाबी कोर्ट ने रियाज़ की हत्या का दोषी पाया था और मौत की सज़ा सुनाई थी. दसों भारतीय नागरिकों की आर्थिक स्थिति ब्लड मनी चुकाने की नहीं थी. इसलिए इनकी सज़ा माफ़ी के बदले ब्लड मनी देने का काम भारतीय मूल के एसपीएस ओबेरॉय कर रहे हैं जो दुबई के एक उद्योगपति हैं. ओबेरॉय ‘सरबत दा भला’ नाम के एनजीओ के अध्यक्ष हैं जो इस तरह के मामलों में फंसे लोगों की मदद करते हैं.

बीबीसी हिंदी के अनुसार –
“ओबेरॉय ने अपने एनजीओ सरबत दा भला के बारे में जानकारी देते हुए कहा 2006 से 2010 के बीच 123 युवकों को मौत की सज़ा और 40 साल तक जेल की सज़ा सुनाई गई थी. जो मामले शारजाह, दुबई, अबु धाबी के थे उन्हें हमने अपने हाथों में ले लिया और इन मुक़दमों को लड़ा.
क्योंकि जिन युवाओं को सज़ा दी गई थी वो आर्थिक तौर पर कमज़ोर हैं. यहां तक कि वो अपने लिए वक़ील भी नहीं कर सकते और ब्लड मनी भी नहीं दे सकते. सरबत का भला चैरिटी संस्था का ट्रस्ट इनकी मदद करता है.
अब तक हमने 88 युवकों को फांसी से बचाया है और वो सब अब अपने घर जा चुके हैं. ये युवक पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और हैदराबाद के थे. पांच युवक पाकिस्तान के और पांच बांगलादेश के थे”

मुहम्मद रियाज़ के पिता ने समझौते के काग़ज़ात कोर्ट में जमा करा दिए हैं. कोर्ट ने आगे की कार्यवाही के लिए 12 अप्रैल 2017 की तारीख़ दी है.
आज जब भारत और पाकिस्तान के नागरिक, मीडिया और सरकारें एक दूसरों को बुरा भला कहने और नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते, दोंनों देशों की सीमाओं में अक्सर तनातनी का माहौल बना रहता है. ऐसी स्थिति में यदि यह देखने को मिले एक पाकिस्तानी पिता ऐसे 10 आरोपियों को माफ करता है जो उनके बेटे के हत्यारे हैं, तो यह दोनों ही देश के संबंधों को सुधारने के लिए और नागरिकों के अन्दर की तल्खियों को कम करने के लिए काफी है.
एक पिता पाकिस्तान से निकल कर अबू धाबी पहुंचा और अबू धाबी कोर्ट में हाजिर हो कर समझौते के कागजात पर हस्ताक्षर करता है. इसलिए नहीं कि अपने बेटे को न्याय मिले बल्कि इसलिए आरोपियों को मौत की सजा से बचाया जाए सोचिए भारत के 10 आरोपी जिस पर पाकिस्तानी लड़के के हत्या का आरोप है जिसमें कोर्ट ने सजा-ए-मौत दी है और अचानक से उस लड़के का पिता कोर्ट पहुंचकर 10 आरोपियों को माफ करने का फैसला लेता है सोचिए कितनी बहादुरी की बात है. अपने बेटे के हत्यारे को मौत की सजा से बचाना , 10 भारतीयों के माता पिता बहुत सी दुआएं देते होंगे
ऐसे वक्त में जबकि हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच सरहद पर एक दूसरे को मार गिराए जाने का सिलसिला चल रहा है इसी बीच पाकिस्तानी पिता अपने बेटे के हत्यारे को सजा-ए-मौत से बचाता है यह बहुत महत्वपूर्ण संदेश है दोनों देशों के राजनैतिक आकाओं के लिए वह अपने छद्म राजनीति से बाज आए और दोनों देशों के बीच आपसी मैत्री को प्रगाढ़ करे.
पिता रियाज़ कहते हैं, ”मैंने अपने बेटे को खोया ये मेरी बदक़िस्मती थी. अगर मैं इन लड़कों को माफ़ नहीं करता तो क्या होता? मैं युवा पीढ़ी से अपील करता हूं कि वो ऐसे झगड़े ना करे, अपने काम से काम रखे और अपने देश और माता-पिता का नाम रोशन करें.”
युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए रियाज़ ने कहा ”मैंने उन 10 लोगों को माफ़ कर दिया और उनकी ज़िंदगी अल्लाह ने बचाई है, मेरा तो सिर्फ़ नाम है. यहां आने वाले हर एक व्यक्ति के साथ 10 लोगों की ज़िंदगियां जु़ड़ी होती हैं, उनके माता-पिता, बीवी और बच्चों की.”

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Faizan Tabrazee

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