नज़रिया – 23 मई के बाद नई भूमिका में होगें मोदी और राहुल

नज़रिया – 23 मई के बाद नई भूमिका में होगें मोदी और राहुल

मोदी कैबिनेट के चेहरे रविशंकर प्रसाद को पटना एयरपोर्ट पर काले झंडे दिखा दिये जाते है। झंडे दिखाने वाले बीजेपी के ही राज्यसभा सदस्य आर को सिन्हा के समर्थक थे। मोदी कैबिनेट के सबसे बडबोले मंत्री गिरिराज सिंह का टिकट नवादा से कट जाता है और गिरिराज इसके लिये बिहार प्रदेश के अध्यक्ष नित्यानंद राय […]

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 पुण्य प्रसून वाजपेयी की कलम से – मोदी जी जन्मदिन की बधाई….2019 आप जीत रहे हैं!

पुण्य प्रसून वाजपेयी की कलम से – मोदी जी जन्मदिन की बधाई….2019 आप जीत रहे हैं!

पहली तस्वीर….लुटियन्स दिल्ली वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरीये पिछले दिनो प्रधानमंत्री जब सचिवों से सवाल जवाब कर रहे थे, तब किसी सवाल पर एक सचिव अटक गये। और अटके सवाल पर कोई सीधा जवाब जब सचिव महोदय नही दे पाये तो प्रधानमंत्री ने कुछ उखड़कर कहा आप ऐसे ही जवाब 2019 में हमारे चुनाव जीतने के […]

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 "अब्बास भाई…. माफ करना ! आपके दर्द को मैं दुनिया को बता रहा हूं"

"अब्बास भाई…. माफ करना ! आपके दर्द को मैं दुनिया को बता रहा हूं"

नाम -आसिफ, उम्र-25 बरस, शिक्षा-ग्रेजुएट पिता का नाम-अब्बास, उम्र 55 बरस, पेशा-पत्रकार मां का नाम-लक्ष्मी, उम्र 48 बरस, पेशा-पत्रकारिता की शिक्षिका जो नाम लिखे गये हैं, वे सही नहीं हैं। यानी नाम छिपा लिए गये हैं। क्योंकि जिस घटना को मां-बाप ने ये कहकर छिपाया है और बेटे को समझा रहे हैं कि देश तो […]

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 नज़रिया – राजनीतिक सत्ता से बड़ी ना कोई विचारधारा ना ही कोई बिजनेस

नज़रिया – राजनीतिक सत्ता से बड़ी ना कोई विचारधारा ना ही कोई बिजनेस

क्या राजनीतिक सत्ता का खेल अब इस चरम पर पहुंच गया है, जहां देश में हर विचार सत्ता के लिये है। और सत्ता का मतलब है सबसे ज्यादा मुनाफा। कारपोरेट हो या मीडिया। अदालत हो या औद्योगिक घराने। धंधा खनन का हो या इन्फ्रास्ट्रक्चर का। सभी को चलना सत्ता के इशारे पर ही है और […]

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 नज़रिया – 2014 के जनादेश ने कैसे बदल दिया मीडिया को

नज़रिया – 2014 के जनादेश ने कैसे बदल दिया मीडिया को

क्या वाकई भारतीय मीडिया को झुकने को कहा गया तो वह रेंगने लगा है। क्या वाकई भारतीय मीडिया की कीमत महज 30 से 35 हजार करोड की कमाई से जुड़ी है। क्या वाकई मीडिया पर नकेल कसने के लिये बिजनेस करो या धंधा बंद कर दो वाले हालात आ चुके हैं। हो जो भी पर […]

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 ये इमरजेन्सी नहीं,लोकतंत्र का मित्र बनकर लोकतंत्र की हत्या का खेल है

ये इमरजेन्सी नहीं,लोकतंत्र का मित्र बनकर लोकतंत्र की हत्या का खेल है

‘मास्टरस्ट्रोक’ रोकने के पीछ सत्ता का “ब्लैक स्ट्रोक “ क्या ये संभव है कि आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम ना लें । आप चाहें तो उनके मंत्रियो का नाम ले लीजिये । सरकार की पॉलिसी में जो भी गड़बड़ी दिखाना चाहते है, दिखा सकते हैं । मंत्रालय के हिसाब के मंत्री का नाम लीजिए […]

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