ज़िंदगी के आखिरी दिनों में मेजर ध्यानचंद के पास इलाज के लिए पैसे भी नहीं थे

ज़िंदगी के आखिरी दिनों में मेजर ध्यानचंद के पास इलाज के लिए पैसे भी नहीं थे

घनी अंधेरी रात थी, चांद रोशनी देने के लिए मद्धम सी रोशनी से चमक रहा था । हरी- हरी घास के मैदान में 17-18 साल का एक लड़का हॉकी खेल रहा था । साथी देख खूब हंस रहे थे , किसी ने फिकरा कसा , “गर्लफ्रेंड से मिल आए हो ” इस तरह के सवालों […]

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