ग़ज़ल – जाउंगा कहाँ ऐ दिल तुझको छोड़ कर तन्हा

ग़ज़ल – जाउंगा कहाँ ऐ दिल तुझको छोड़ कर तन्हा

जाउंगा कहाँ ऐ दिल तुझको छोड़ कर तन्हा कैसे मैं करूं बढ़ती उम्र में सफर तन्हा   भीड़ में या मेले में मैं रहा जहाँ भी हूँ  ढूंढती रही खुद को ये मिरी नज़र तन्हा   हम सफर था जो मेरा हमकदम था जो मेरा वो चले गया मुझको आज छोडकर तन्हा   कानाफूसी करते […]

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 मिर्ज़ा ग़ालिब – यानी बाबा-ए-सुखन

मिर्ज़ा ग़ालिब – यानी बाबा-ए-सुखन

मिर्ज़ा गा़लिब के यौमे पैदाइश के बारे मे सही इल्म नहीं है। फिर भी जो सनद हासिल हैं उनके ज़रिए मालूम होता है कि 27 दिसंबर 1796 आगरा में इस हस्ती ए अजी़म ने इस धरती में जन्म लिया। हाँ इसमें सभी का इत्तेफाक है कि 15 फरवरी 1869 को ये शायर ए आज़म इस […]

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 नहीं रहे 'उर्दू शायरी में गीता' लिखने वाले 'अनवर जलालपुरी"

नहीं रहे 'उर्दू शायरी में गीता' लिखने वाले 'अनवर जलालपुरी"

कल 01 जनवरी 2018 को ब्रेन हेम्रेज के कारण अनवर जलालपुरी का इन्तकाल हो गया। अनवर जलालपुरी का जन्म 6 जुलाई 1947 को उत्तर प्रदेश के आम्बेडकरनगर जिले के जलाल पुर नामक ग्राम में हुआ था। पूरा नाम अनवार अहमद – अनवर जलालपुरी दशकों से पूरे हिंदुस्तान और खाड़ी देशों में भी वे मुशायरों के […]

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 भारत के बंटवारे की एक कहानी – “सतरंजे का बंटवारा”

भारत के बंटवारे की एक कहानी – “सतरंजे का बंटवारा”

सतरंजे का एक सिरा सुल्तान खा़न के हाथ में दूसरा सिरा सरदार खा़न के हाथ में था। सुल्तान कह रहा था- “सारा सामान बेच दिये ,एक सतरंजा बचा है , उस पे भी तुम्हारी नज़र गड़ी हुई है“, सतरंजा न हुआ सल्तनत हो गई। सरदार ख़ान चीखा “मैं बड़ा हूँ , जो चाहुँगा करुंगा ।” […]

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 ग़ज़ल- मुसव्विर हूं सभी तस्वीर में मैं रंग भरता हूं

ग़ज़ल- मुसव्विर हूं सभी तस्वीर में मैं रंग भरता हूं

हमेशा ज़िन्दगानी में मेरी ऐसा क्यूं नहीं होता जमाने की निगाहों में मैं अच्छा क्यूं नहीं होता उसूलों से मैं सौदा कर के खुद से पूछ लेता हूँ मिरी सांसे तो चलती हैं मै ज़िंदा क्यूं नही होता हरिक को एक पगली बेटा कह कर के बुलाती है मगर उस भीड़ में तब कोई बेटा […]

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 कविता – मुझे कागज़ की अब तक नाव तैराना नहीं आता

कविता – मुझे कागज़ की अब तक नाव तैराना नहीं आता

तुम्हारे सामने मुझको भी शरमाना नहीं आता के जैसे सामने सूरज के परवाना नही आता ये नकली फूल हैं इनको भी मुरझाना नही आता के चौराहे के बुत को जैसे मुस्काना नही आता हिजाबो हुस्न की अब आप क्यों तौहीन करते हो किसी को सादगी में यूँ गज़ब ढाना नहीं आता फकीरों की जमातों में […]

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 गज़ल – गुज़र गई है मेरी उम्र खुद से लड़ते हुए – "ख़ान"अशफाक़ ख़ान

गज़ल – गुज़र गई है मेरी उम्र खुद से लड़ते हुए – "ख़ान"अशफाक़ ख़ान

गुज़र गई है मिरी उम्र खुद से लड़ते हुए मुहब्बतों से भरे वो खतों को पढ़ते हुए धुएं की तरह बिखरता रहा फज़ाओं में के उम्र बीत गई हवा संग उड़ते हुए बिखर गए हैं मिरे ख्वाब सह्र होते ही मैं देखता हूं सभी ख्वाब यार जगते हुए खुदा ए बंद से इतनी दुआ है […]

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