यूपी डायरी : पार्ट 2 –  डर की काई से लिपटी सेंट्रो (मुज़फ्फ़रनगर से ग्राउन्ड रिपोर्ट)

यूपी डायरी : पार्ट 2 – डर की काई से लिपटी सेंट्रो (मुज़फ्फ़रनगर से ग्राउन्ड रिपोर्ट)

मुज़फ्फरनगर का सरवट इलाका, मेन सिटी से थोड़ी दूर। यहां एक लाइन से कंस्ट्रक्शन और लकड़ी के सामान से जुड़ी कई दुकान हैं। इसी पंक्ति के बीचोंबीच घर है हामिद हसन का। घर की चौखट में दाखिल होने से पहले ही कानों में आरा मशीन की घरघराहट पड़ती है। घर में दाखिल होते ही दिखता […]

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 यूपी डायरी: पार्ट 1 – संकरी गली का पांचवां घर और 2 जोड़ी आखें  (मेरठ से ग्राउंड रिपोर्ट)

यूपी डायरी: पार्ट 1 – संकरी गली का पांचवां घर और 2 जोड़ी आखें (मेरठ से ग्राउंड रिपोर्ट)

मेरठ में एक जगह है, लिसाड़ी गेट थाना इलाका । वहां एक रिहाइश है कांच का पुल कॉलोनी । इस जगह समाज का वो तबका रहता है, जो सब्जी बेचकर, दिहाड़ी पर काम कर, रिक्शा चलाकर अपना गुज़ारा चलाता है। ऐसे में संकरी होती गली के एक छोर पर घर है, अलीम अंसारी, होटल पर […]

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 अक्सर खामोश रहने वाले गुलजार की बोली को समझने की कोशिश करनी ही होगी

अक्सर खामोश रहने वाले गुलजार की बोली को समझने की कोशिश करनी ही होगी

कहीं पढ़ा था कि गुलजार साहब टॉलस्टॉय के एक वाक्य से बेहद प्रभावित हैं। ‘ तब तक मत लिखो, जब तक उसे लिखे बिना रह नहीं सकते हो।’ माने तब तक मत कहो जब तक कहे बिना रह नहीं सकते हो। तो अब अपने जीवन के 81 वें साल में अगर वो कुछ कह रहे […]

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 जब संस्थाएं दीवार की तरह गिरती हैं, तो उनके मलबे में धीरे-धीरे सब दब जाता है

जब संस्थाएं दीवार की तरह गिरती हैं, तो उनके मलबे में धीरे-धीरे सब दब जाता है

जब संस्थाएं दीवार की तरह गिरती हैं, तो उनके मलबे में धीरे-धीरे सब दब जाता है … सबसे पहले शुरुआत तार्किकता से होती है, फिर उसकी जगह न्याय का प्राकृतिक सिद्धांत ले लेता है. सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा इस गिरावट को समझने के लिए एकदम मुफीद उदाहरण हैं. परद -दर परत प्याज के छिलकों की […]

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 नज़रिया – बड़ी मुश्किल है डगर पड़ोस की

नज़रिया – बड़ी मुश्किल है डगर पड़ोस की

बात बीते साल की है, दिसंबर महीने के एक ठंडे दिन बीजिंग के खूबसूरत ग्रेट हॉल ऑफ पीपल में एक खास राजकीय मेहमान को रेड कारपेट का स्वागत दिया गया. जिस गर्मजोशी के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मालदीव के राष्ट्रपति यामीन गय्यूम से हाथ मिलाया उसकी गर्माहट ना सिर्फ भारत ने महसूस की […]

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 क्या आतंकी संगठन "सनातन संस्था' को बैन नहीं कर देना चाहिए?

क्या आतंकी संगठन "सनातन संस्था' को बैन नहीं कर देना चाहिए?

ज्यादा दिन नहीं बीते हैं,जब साहित्यकार दामोदर माऊजो ने कहा था कि सनातन संस्था कैंसर की तरह है,इसे बैन कर देना चाहिए। कलबुर्गी ,दाभोलकर से लेकर गौरी लंकेश तक की कड़ियों को अगर जोड़ा जाए,तो सनातन संस्था की कहानी एक थर्ड ग्रेड वाली सीरियल मर्डर मिस्ट्री से कम नहीं। बस फर्क इतना है कि यहां […]

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 भूख से होने वाले मौतों का ज़िम्मेदार कौन?

भूख से होने वाले मौतों का ज़िम्मेदार कौन?

रॉकेट साईंस नहीं है। हम पिछले साल ग्लोबल हंगर इंडेक्स में तीन पायदान नीचे सरक गए,यानी 119 देशों की लिस्ट में भारत 97 से 100 वें नंबर पर आ गया । परिवार राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण बताता है कि 1998-2002 के बीच 17 फीसदी बच्चे ही कुपोषण का शिकार थे, लेकिन 2012-2016 के बीच 21% […]

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 रामनाथ गोयनका और धीरू भाई की वो ग़लती

रामनाथ गोयनका और धीरू भाई की वो ग़लती

अक्टूबर 1985 का एक दिन था। अंग्रेजी अखबार फायनेंशनल एक्सप्रेस और पीटीआई दोनों ने बॉम्बे डाइंग हाऊस के खिलाफ़ एक खबर और एडिटोरियल दोनों छापे। रामनाथ गोयनका उस वक्त पीटीआई के चेयरमैन भी थे। एडिटोरियल पायदान में सबसे ऊपर होने के बावजूद उन्हें ये समझने में मुश्किल हो रही थी कि बॉम्बे डाइंग के खिलाफ़ […]

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 सच्चाई के बहुत करीब हैं, अरुण शौरी के कुछ सवाल

सच्चाई के बहुत करीब हैं, अरुण शौरी के कुछ सवाल

अरूण शौरी कई बार सीधा बोलते हैं,कई बार तीखा बोलते हैं। लेकिन बोलते सही हैं। आज वो मन की बात वाली किताब पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन एक सवाल उन्होंने अस्सी के दशक में उठाया था सवाल सीधा सा था, कि क्या ये मुमकिन है कि मध्यम वर्गीय परिवार का एक लड़का एकाएक 5.4 […]

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 एक 'स्टार' का टैक्सी से 'प्रोड्यूसर' तक का जुनूनी सफर..

एक 'स्टार' का टैक्सी से 'प्रोड्यूसर' तक का जुनूनी सफर..

चंद रोज़ से पहले हॉलीवुड के डॉल्बी थियेटर में बीते साल दुनिया छोड़ने वाले कलाकारों में जब शशि कपूर की तस्वीर दिखाई गई, ,उस वक्त नम हो रहीं आंखों में दर्शक दीर्घा में बैठे जेम्स आइवरी की भी थीं। बहुत संभव है कि उस वक्त उनके ज़हन में उन की पहली फिल्म ‘द हाऊसहोल्डर’ का […]

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