राजनीति

ऐसी सरकार चाहिए जो आदिवासियों के जल जंगल और जमीन पर उनका अधिकार दिलाये

ऐसी सरकार चाहिए जो आदिवासियों के जल जंगल और जमीन पर उनका अधिकार दिलाये

कल 16 सितम्बर 2018 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के खवासा में जयस के नेतृत्व में आदिवासी एकता महासम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन सम्पन्न हुआ . आदिवासी एकता महासम्मेलन झाबुआ, रतलाम, आलीराजपुर, धार, देवास, राजस्थान के बांसवाड़ा, गुना और भोपाल से हजारो आदिवासी युवा शामिल हुए.
आदिवासी एकता महासम्मेलन में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारो को धरातल लागू करवाने के लिए आदिवासी सरकार बनाने का संकल्प लिया है .
आदिवासी एकता महासम्मेलन में जयस के युवाओ ने झाबुआ, रतलाम और दाहोद जिले में नेशनल कॉरिडोर के नाम पर प्रवस्तावित गांवो के विस्थापन का विरोध किया और कहा कि 8 लेन बनाना ही है तो अंडर ग्राउंड बनाया जाए लेकिन आदिवासी गांवो को विस्थापन कर बनाया जाने वाला कॉरिडोर किसी भी कीमत पर मंजूर नही है .
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आदिवासी एकता महासम्मेलन में जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ हीरा अलावा ने प्रदेश की शिवराज सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज देश मे गांव को स्मार्ट बनाने की बजाय शिवराज और मोदी सरकार के राज में बड़े बड़े शहरों को स्मार्ट बनाने की बाते हो रही हैं, हमे ऐसी सरकारें नही चाहिए जो आदिवासियों की कब्र पर विकास की नींव खड़ी करना चाहती है.
जयस के राष्ट्रीय संरक्षक के कहा आदिवासियों के गांवो को विस्थापित कर विकास की नींव खड़ी करने वाली सरकार आदिवासियों को मंजूर नही है हमे ऐसी सरकार चाहिए जो आदिवासियों के जल जंगल और जमीन पर उनका अधिकार दिलाये हमे ऐसी सरकार चाहिए जो आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार पांचवी अनुसूचि, पैसा कानून, वनाधिकार कानून को धरातल पर लागू करके दिखाए जो काम सिर्फ और सिर्फ आदिवासी सरकार ही कर सकती है जिसके लिए सभी आदिवासी युवाओ को मिलकर संघर्ष करने करने को कहा.
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जयस के राष्ट्रीय संरक्षक ने कहा कि अगर आदिवासियों को अपनी ज़मीन बचाना है अगर आदिवासियों को जल जंगल और ज़मीन पर अधिकार चाहिए तो तो उनके पास सिर्फ एक ही रास्ता है आगामी विधानसभा चुनाव में आदिवासी सरकार बनाना क्योँकि आदिवासी सरकार ही आदिवासियों को बिना पैसे और बिना क़ानूनी लड़ाई के जमीन वापस दिला सकती है अन्यथा छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा में आदिवासियों के साथ जो हो रहा है वही मध्यप्रदेश में भी होगा .
आदिवासी एकता महासम्मेलन को संबोधित करते हुवे विक्रम यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर कन्हैया मेंडा सर ने कहा कि आज हमारे आरक्षण को खत्म करने के लिए एट्रोसिटी एक्ट को खत्म करने के लिए सवर्ण समाज एकजुट होकर सड़को पर उतर रहा है लेकिन आदिवासी सामाज का एक बहुत बड़ा वर्ग अभी भी अपने संवैधानिक अधिकारो को हासिल करने के लिए खुद संघर्ष करने की बजाय आदिवासियों को पिछले 70 सालों से लूटने वाली राजनीतिक पार्टियों के पीछे भाग रहा है.
थांदला जयस प्रभारी वीर सिंह भाभर ने समाज मे बदलाव के लिए नए युवाओ को राजनीतिक अखाड़े में भाग लेने के लिए आगे आने के लिए कहा. भोपाल से आये आनंद निषाद ने कहा कि प्रदेश के 40 लाख मांझी समाज जयस के साथ है और आदिवासी सरकार बनाने के लिए आदिवासी मुख्यमंत्री बनने के लिए जयस का पुरजोर समर्थन करेगा .
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जकास के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश महावि ने समाज मे बदलाव लाने के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सभी वर्गों से सहयोग की अपील की .
राजस्थान से आये कांतिभाई ने समाजजिक एकता को मजबूत करने के लिए समाज के सभी बड़े बुजुर्गों और बच्चो का सम्मान करने की नसीहत देने के साथ साथ सभी को मिलकर पांचवी अनुसूचि के प्रावधानों को हासिल करने के लिए संघर्ष करने को कहा.
रतलाम जयस प्रभारी लक्ष्मण कटारा ने कहा कि आदिवासियों की ज़मीन बचाने के लिए चाहे नेशनल कॉरिडॉर के नाम पर या फिर मेडिकल कालेज के नाम पर आदिवासियों की जमीन धोखे में रखकर छीनी गई है अगर वापस चाहिए तो अगामी 2 महीनों बाद आदिवासी सरकार बनानी पड़ेगी आदिवासी मुख्यमंत्री बनाना पड़ेगा
सैलाना से आये आदिवासी  युवा और कमलेशवर डोडियार ने कहा आदिवासियों के जल जंगल और ज़मीन पर अधिकार हासिल करने के लिए युवाओ को राजनीति के मैदान में उतरकर अबकी बार आदिवासी सरकार बनाना ही पड़ेगा .
देवास जिले से आये सूरज डावर ने कहा कि शिवराज और मोदी सरकार आदिवासी मोर्चे पर नाकामयाब साबित हुवे है ऐसी सरकार को हमे अगले चुनावो में उखाड़कर फेक देना चाहिए . आदिवासी एकता महासम्मेलन में मंच का बखूबी संचालन कैलाश बारिया,गजेंद्र सिंगाड, व राजेश मेड़ा द्वारा किया गया. आभार प्रीतमसिंह मुणिया द्वारा माना गया.

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