अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नार्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग से मुलाक़ात पर सबकी नजर बनी रही है. क्योंकि 1950 -1953 के युद्ध से दोनों देशों में संपर्क नही रहा है. एक दूसरे के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले देशों के बीच ये बैठक वास्तव में बेहद मायने रखती है वो भी तब जब ट्रम्प जी -7 देशो की बैठक को गुस्से में छोड़ कर आये हो।
कनाडा के क्यूबेक में हुए जी 7 देशो के शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अच्छे से ऊधम मचाई. शुरुआत में ट्रम्प के इसमें हिस्सा न लेने की बातें सामने आ रही थी लेकिन बाद में उन्होंने इसमें हिस्सा तो लिए लेकिन इस्पात और एलुमिनियम के आयात पर नए टैक्स लगाने की घोषणा भी कर दी।
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत का मज़ाक बनाते हुए निजी बातें भी साझा कर दी जिसमें उन्हें फोन पर मोटरसाइकिल पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी आधी कर देने की सूचना दी गई थी। ट्रम्प ने दो देशी के बीच समान टैक्स की वक़ालत करते हुए कहा कि कई देश अमेरिका को लूटने पर लगे हैं. ऐसा ही चलता रहा तो अमेरिका को इन सभी देशों से व्यापार बंद करना पड़ेगा. इसी के साथ डोनाल्ड ट्रंप सम्मेलन बीच में छोड़कर चले गए।
जी 7 देशो का प्रस्ताव उनके जाना के बाद पारित किया गया जिसको पढ़ने के बाद डोनाल्ड भड़क उठे और एक के बाद एक ट्वीट कर अपना गुस्सा निकाला। जी 7 के अन्य देशों ने डोनाल्ड के इस व्यवहार को बचकाना बताया और इसका विरोध किया। जी 7 देशो के सम्मेलन में  ट्रंप के व्यवहार के पीछे वजह बिल्कुल साफ है अमेरिका की जीडीपी गिरने का अनुमान व इसी वर्ष अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव, जिसमे अमेरिकी की आधी संसद चुनी जाएगी।
जीडीपी को सुधारने के लिए ही  ट्रंप ने पेरिस जलवायु संधि और ईरान से डील तोड़ी, नाटो का बजट भी कम किया और चीन के साथ सीमा शुल्क कोलेकर झगड़ा किया, जिसके चलते पिछले साल अमेरिकी जीडीपी 3.5 फीसदी के करीब पहुँच गई थी लेकिन उसके बाद से यह धीमी पड़ती जा रही है जीडीपी गिरने का सिलसिला ऐसे चलता रहा तो साक के अंत में होने वाले चुनावों में इसका असर दिखना तय है।

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Ankita Chauhan

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