दोस्तों आज फेसबुक का जन्मदिन है. आज ही के दिन 4 फरवरी 2004 को फेसबुक की शुरुआत हुई थी. फेसबुक, बहुप्रसिद्ध व चर्चित एक ऐसी सोशल नेटवर्किंग साइट है जिसने, अनगिनत लोगों को अपनों से मिलवाया है. फिर वह चाहे पुराने दोस्त हो, दूरदराज रहने वाले परिवार के सदस्य हो, या अन्य कोई करीबी जो दुनिया के किसी भी कोने मे हो, जिसे व्यक्ति ने सिर्फ याद ही किया हो, उसे भी फेसबुक के माध्यम से खोज सकते है.
फेसबुक एक ऐसी सोशल साइट है जिसके, माध्यम से हर पल की खबर अच्छी हो या बुरी, मेसेज या पिक्चर के माध्यम से शेयर कर सकते है.
बदलते वक्त के साथ फेसबुक ने खुद को बहुत Updated कर लिया है. जिस पर व्यक्ति को हर छोटी से छोटी बात, न्यूज़ रिपोर्ट, शॉपिंग आईडिया, क्राफ्ट, कुकिंग, विडियो और भी छोटी से छोटी बात का पता फेसबुक से लगाया जा सकता है.

फेसबुक का इतिहास
फेसबुक के संस्थापक मार्क इलियट जुकेरबर्ग है. इनका जन्म 14 मई 1984 को न्यूयार्क,अमेरिका मे हुआ था. हावर्ड विश्वविद्यालय मे, शिक्षा ग्रहण करते Facebook नामक एक साइट बनाई. जुकेरबर्ग Facebook के प्रमुख संस्थापक होने के साथ ही  विश्व के सबसे कम उम्र के दौलतमंदों में से एक है.फेसबुक का इतिहास बहुत ज्यादा पुराना तो नही है, परन्तु बहुत रोचक है. क्योंकि, फेसबुक ने बहुत कम समय में बहुत जल्दी तरक्की हासिल की है.
इसका आरंभ 2004 में हार्वर्ड के एक छात्र मार्क ज़ुकेरबर्ग ने की थी.तब इसका नाम द फेसबुक था.इस वेबसाइट में मार्क जुकेरबर्ग  के साथियों ने काफी योगदान दिया. जिसमें  एडुआर्ड़ो सवेरिन ने व्यवसायिक पहलुओं, डीउस्टिन मोस्कोवीटज ने प्रोग्रामिग़, एंड्रयू मककोल्लुम ने ग्राफिक्स आर्टिस्ट तथा च्रिस ह्यूज ने जुकेरबर्ग की वेबसाइट के प्रमोशन में सहायता की.
कॉलेज नेटवर्किग वेब के रूप में आरंभ के बाद शीघ्र ही यह कॉलेज परिसर में लोकप्रिय होती चली गई.शुरू में, हावर्ड विश्वविद्यालय में ही इसकी समिति बनाई गई. धीरे-धीरे बोस्टन, आइवी लीग, स्टेनफोर्ड जैसे कई विश्वविद्यालयों मे इसका विस्तार किया गया. कुछ ही महीनों में यह नेटवर्क पूरे यूरोप में पहचाना जाने लगा.
-अगस्त 2005 में, इसे खरीद कर Facebook.com के नाम से रजिस्टर्ड किया गया. सितम्बर  2005 में, इस पर हस्ताक्षर हुए. उसके बाद से अमेरिका व ब्रिटेन के सभी विश्वविद्यालय मे इसका प्रसार शुरू हुआ. उसके बाद धीरे-धीरे कर सम्पूर्ण विश्व मे इसका प्रसार शुरू हुआ.
-सितम्बर 2006 में,यह विस्तृत रूप में, पूरे देश के सामने आया. तथा पंजीकृत बहुत पुराने ईमेल के पते के साथ, इस पर अपनी ईमेल आइडी बना कर इसे उपयोग किया जाने लगा. इसके साथ ही फेसबुक बड़ी-बड़ी वेबसाइट से जुड़ने लगी.
-2007 में, Facebook की प्रसिद्धि को देखते हुये कई बड़ी व्यापारिक कंपनियाँ व्यापार को बढ़ावा देने के लिए फेसबुक से जुड़ गई. जिससे फेसबुक को अरबों रुपयों का फायदा होने लगा. 2007 में ही माइक्रोसॉफ्ट ने Facebook को खरीद कर इसे अंतर्राष्ट्रीय विज्ञापन के अधिकार प्राप्त कर इसमें शामिल किया.
-2008 में, आयरलैण्ड के डबलिन मे Facebook का अन्तर्राष्ट्रीय मुख्यालय खोलना तय हुआ. इसके साथ ही इसका उन्नति का ग्राफ बहुत तेजी से बड़ा.
बढ़ती उन्नति के 2009 मे Facebook ने सारे रिकॉर्ड तोड़े और इस साइट पर यूजर्स की संख्या लाखों-करोड़ों मे पहुंच गई.
-2010 में Facebook ने लोगों की पसंद देखते हुए कई बड़ी मोबाईल कंपनियों, ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों से साझा कर बहुत बड़ी डील करी.
-2011 में, फेसबुक के बढ़ते उपयोग को देखते हुये, यूजर पर्सनल डाटा की सुरक्षा के लिए कुछ बदलाव किये.जिसके अंतर्गत यूजर अपने हिसाब से अपने अकाउंट की सेटिंग कर सकता है. जिससे साइबर क्राइम न हो पाये.
-2012 में Facebook ने अपना खुद का रिकॉर्ड तोडा.तथा अमेरिका मे इसके शेयर की कीमत बढ़ कर आसमान छूने लगी.
-2013 से आज तक Facebook की एक आम रिपोर्ट भी निकाले, तो इसकी ख्याति इतनी बढ़ गई है, जिसे हर दूसरा व्यक्ति फेसबुक से परिचित है, और इसे उपयोग भी करता है.
हर तरीके से एक सामान्य मेसेज से ले कर, फोटो, विडियो, आवश्यक जानकारी, जोक्स, कविताएँ, कहानी-किस्से, कुकिंग की रेसिपी देखने से बनाने तक की विडियो, पूरे विश्व की तस्वीरे से विडियो तक, यहां तक की परीक्षा की तैयारी, शॉपिंग अन्य अनगिनत चीज़े जो की हम Facebook के माध्यम से देख ढूंढ और पूछ सकते है.

फेसबुक के कुछ राज

1.फेसबुक का नीला रंग
दुनिया में इतने रंग है लेकिन फेसबुक का रंग नीला ही क्यों? दरअसल फेसबुक का रंग नीला है क्योंकि फेसबुक चीफ मार्क जुकरबर्ग सबसे ठीक तरह से नीला रंग ही देख सकते हैं. मार्क जुकरबर्ग को रेड-ग्रीन कलर ब्लाइंडनेस है. एक रशियन टेलिविजन टॉक शो में बात करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें कलर ब्लाइंडनेस है और नीला ही वह रंग है जिसे वे सबसे बेहतर ढंग से देख सकता हूं. इसीलिए उन्होंने फेसबुक का रंग नीला रखा है.
2.जिसे ब्लॉक नहीं किया जा सकता
फेसबुक पर एक ऐसा शख्स भी है जिसे कभी भी ब्लॉक नहीं किया जा सकता है. जी हां, ऐसा बिल्कुल संभव है. कोई हैरत की बात नहीं है कि वह प्रोफाइल खुद मार्क जुकरबर्ग की है. फेसबुक पर कोई भी व्यक्ति उन्हें ब्लॉक नहीं कर सकता. कोशिश करके देखिए.
3.जुकरबर्ग को खोजना इतना आसान
अगर आप फेसबुक पर लॉग इन करके अपने होम पेज पर हैं तो उस वक्त आपका यूआरएल होता है https://www.facebook.com और दिलचस्प बात यह है कि अगर आप अपने इसी url के आगे बस /4 जोड़ देंगे तो आप सीधे मार्क जुकरबर्ग की वॉल पर पहुंच जाएंगे.
4.दो देशों में फेसबुक बैन भी है
फेसबुक पर अरबों यूजर्स हैं जिनमें दुनिया के लगभग हर देश के लोग हैं. लेकिन सबसे दिलचस्प बात है कि फेसबुक चीन और उत्तर कोरिया दो देशों में बैन है.
5.कोई मर जाए तो अकाउंट का क्या होता है?
यदि हमारी जान पहचान में कोई किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो हम फेसबुक पर इस बात की रिपोर्ट कर सकते हैं. फेसबुक ऐसी प्रोफाइल्स को एक तरह का स्मारक (memorialized account) बना देता है. इस अकाउंट में कोई भी व्यक्ति लॉग इन नहीं कर सकता है. इस तरह के अकाउंट में कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता.
6.हर सेकंड 5 नए लोग फेसबुक पर
फेसबुक के जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक हर सेकंड 5 नए लोग फेसबुक पर अपना अकाउंट बनाते हैं. फेसबुक पर हर रोज लगभग 30 करोड़ तस्वीरें अपलोड की जाती हैं. हर 60 सेकंड में 50 हजार कमेंट्स और लगभग 3 लाख स्टेटस लिखे जाते हैं. वहीं दूसरी ओर फेसबुक पर लगभग 9 करोड़ फेक प्रोफाइल्स हैं.
7.लाइक की जगह था ये नाम
फेसबुक पर हर जगह लाइक का ऑप्शन दिखता है. वैसे फेसबुक पर इस ऑप्शन के बारे में काफी विवाद रहा. सबसे पहले इसका नाम ‘AWESOME’ रखा गया था. लेकिन इसे बाद में LIKE किया गया था.
8.ये पोक क्या बला है?
फेसबुक पर एक फीचर है पोक. किसी की प्रोफाइल पर जाकर आप उसे पोक कर सकते हैं. लेकिन इसका मतलब क्या है? दरअसल कोई मतलब नहीं है. ये बस जैसे खेल के लिए है. यहां तक कि फेसबुक हेल्प सेंटर में भी आप पूछेंगे कि ‘poke’ का क्या मतलब है तो आपको कभी पता नहीं चलेगा. इस बारे में मार्क जुकरबर्ग कह चुके हैं कि उन्होंने सोचा था कि वे फेसबुक पर एक ऐसा फीचर बनाएंगे जो बेमतलब होगा. ये बस मस्ती के लिए बनाया गया है.
9.फेसबुक एक बीमारी
फेसबुक का एडिक्शन इन दिनों एक बीमारी का रूप लेता जा रहा है. दुनियाभर में हर उम्र के लोग फेसबुक एडिक्शन डिसऑर्डर यानी फेसबुक की लत से जूझ रहे हैं. इस बीमारी का संक्षिप्त नाम FAD है. इस वक्त दुनिया में लगभग कई करोड़ लोग FAD से ग्रसित हैं.
10.खरीदा इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप को
9 फेसबुक 2004 मार्च में शुरू हुआ और एक साल के भीतर ही इसने दस लाख यूजर्स जुटा लिए थे. जून 2009 तक यह इतना बढ़ चुका था कि यह अमेरिका की नंबर वन सोशल नेटवर्किंग साइट बन गयी. अप्रैल 2012 में फेसबुक ने इंस्टाग्राम और 2014 में वॉट्सऐप को भी खरीद लिया था.
11.कब क्या लॉन्च हुआ
फेसबुक ने सितंबर 2004 में “वॉल”, सितंबर 2006 में “न्यूज फीड”, फरवरी 2009 में “लाइक” बटन और सितंबर 2011 में लाइमलाइन फीचर लॉन्च किया.

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Durgesh Dehriya

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