नज़रिया – क्या आप समाज को बर्बर बनाए जाने का आनंद ले रहे हैं ?

नज़रिया – क्या आप समाज को बर्बर बनाए जाने का आनंद ले रहे हैं ?

नोटबंदी हुई तो किसी को कारण पता नहीं था। ना उद्देश्य ना लक्ष्य। कालाधन, आतंकवाद, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नकली नोट – हर चीज की चर्चा थी। पर जब नोटबंदी नाकाम रही, किसी ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली। किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। ना प्रधानमंत्री, ना वित्त मंत्री, ना आर्थिक सलाहकार ना भारतीय रिजर्व बैंक। देश […]

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