क्या मध्यम वर्ग ने सांप्रदायिकता को ही सर्वोच्च प्राथमिकता और रोज़गार समझ लिया है ? – रविश कुमार

क्या मध्यम वर्ग ने सांप्रदायिकता को ही सर्वोच्च प्राथमिकता और रोज़गार समझ लिया है ? – रविश कुमार

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के कारण एशिया की अर्थव्यवस्था सबसे अधिक प्रभावित होने जा रही है। यहां की जी डी पी शून्य हो सकती है। इसका मतलब है कि हर किसी को एक मुश्किल दौर के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा। तालाबंदी से दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं नीचे चली […]

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 रविश कुमार का लेख शाहीन बाग़ की रोज़ा पार्क्स के नाम

रविश कुमार का लेख शाहीन बाग़ की रोज़ा पार्क्स के नाम

1 दिसंबर 1953 को रोज़ा ने बस की सीट से उठने से इंकार कर दिया। कंडक्टर चाहता था कि अश्वेत रोज़ा गोरों के लिए सीट छोड़ दे। उस समय अमरीका के अलाबामा में ऐसा ही सिस्टम था। चलने के रास्ते से लेकर पानी का नल और बस की सीट गोरे और अश्वेत लोगों में बैठी […]

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 वायु सेना, सरकार के पराक्रम के बीच पत्रकारिता का पतन झाँक रहा है – रविश कुमार

वायु सेना, सरकार के पराक्रम के बीच पत्रकारिता का पतन झाँक रहा है – रविश कुमार

आज का दिन उस शब्द का है, जो भारतीय वायु सने के पाकिस्तान में घुसकर बम गिराने के बाद अस्तित्व में आया है। भारत के विदेश सचिव ने इसे अ-सैन्य कार्रवाई कहा है। अंग्रेज़ी में non-military कहा गया है। इस शब्द में कूटनीतिक कलाकारी है। बसों से लैस लड़ाकू विमान पाकिस्तान की सीमा में घुस […]

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 संस्थाओं की बर्बादी के बीच जनता की मदहोशी

संस्थाओं की बर्बादी के बीच जनता की मदहोशी

सूट-बूट की सरकार से शुरूआत करने वाली मोदी सरकार पांच साल बीतते-बीतते बड़े लोगों की सरकार हो गई है। बड़े लोगों की चिन्ता में जेटली जी दुबले हुए जा रहे हैं। महीनों जजों की कुर्सी ख़ाली रही मगर सरकार अपने अहं की लड़ाई लड़ती रही। आम लोग इंसाफ़ के लिए भटकते रहे। प्रतिष्ठा धूल मिट्टी […]

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 बिहार से लेकर यूपी की परीक्षाओं को लेकर क्यों परेशान हैं छात्र

बिहार से लेकर यूपी की परीक्षाओं को लेकर क्यों परेशान हैं छात्र

सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकारें अब उदासीन बने रहना छोड़ दें। नौजवान यह समझने लगा है कि भर्ती का एलान नौकरी देने के लिए कम, नौकरी के नाम पर सपने दिखाने के लिए ज़्यादा होता है। जब उस भर्ती की प्रक्रिया को पूरा होने में कई साल लग जाते हैं तब नौजवान […]

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 क्या सरकार की नज़र भारतीय रिज़र्व बैंक के रिज़र्व पर है?

क्या सरकार की नज़र भारतीय रिज़र्व बैंक के रिज़र्व पर है?

भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने 2010 में अर्जेंटीना के वित्त संकट का हवाला क्यों दिया कि केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच जब विवाद हुआ तो केंद्रीय बैंक के गवर्नर से इस्तीफा दे दिया और फिर वहां आर्थिक तबाही मच गई। एक समझदार सरकार अपने तात्कालिक सियासी फायदे के लिए एक […]

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