समीक्षा – समाज को बांटने वाली सोच पर गहरा वार करती है "मुल्क"

समीक्षा – समाज को बांटने वाली सोच पर गहरा वार करती है "मुल्क"

जब हम ‘मुल्क’ देख कर बाहर निकले, तो हमारे एक मित्र ने कहा कि ‘मुल्क’ जो बात कहती है, वह पूरे आत्मविश्वास के साथ आज का हिंदुस्तानी मुसलमान कहने की स्थिति में नहीं है। ‘मुल्क’ क्या कहती है? ‘मुल्क’ कहती है कि कोई मुसलमान अपनी देशभक्ति प्रमाणित कैसे करे? क्यों करे? वह ख़ुद पर चस्पां […]

Read More