ग़ज़ल- मुसव्विर हूं सभी तस्वीर में मैं रंग भरता हूं

ग़ज़ल- मुसव्विर हूं सभी तस्वीर में मैं रंग भरता हूं

हमेशा ज़िन्दगानी में मेरी ऐसा क्यूं नहीं होता जमाने की निगाहों में मैं अच्छा क्यूं नहीं होता उसूलों से मैं सौदा कर के खुद से पूछ लेता हूँ मिरी सांसे तो चलती हैं मै ज़िंदा क्यूं नही होता हरिक को एक पगली बेटा कह कर के बुलाती है मगर उस भीड़ में तब कोई बेटा […]

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