नज़रिया – उथल-पुथल का एक आश्चर्यजनक अनुक्रम दिखाई देता है

नज़रिया – उथल-पुथल का एक आश्चर्यजनक अनुक्रम दिखाई देता है

भारत में जो दृश्य इन दिनों दिखाई दे रहे हैं, उन्हें जादुई यथार्थवाद की ही संज्ञा दी जा सकती है! उथल-पुथल का एक आश्चर्यजनक अनुक्रम दिखाई देता है। उस पर भी कमाल यह कि यह सब स्वतःस्फूर्त नहीं, रचा गया मालूम होता है। वैमनस्य की राजनीतिक पूंजी कोई नई धारणा नहीं है, किंतु रामबाण की […]

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