क्या कोई है, जो सुनेगा किसानों की व्यथा

क्या कोई है, जो सुनेगा किसानों की व्यथा

हमारे देश की 80 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से  कृषि से जड़ी हुयी है.आज किसानों  की आत्महत्या करना इस देश के खास लोगों के बीच में आम सा हो गया है. कोई भी किसान की सूध लेने वाला नहीं है.  हजारों किसान अपने हाथों से लगायी हुई फसल को उजड़ते देख अपनी जान दे चुके है. क्या  यह […]

Read More