नज़रिया – आलोचना, लोकतंत्र का अनिवार्य तत्व है

नज़रिया – आलोचना, लोकतंत्र का अनिवार्य तत्व है

बहुत दिनों के बाद या यूं कहें सालों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने प्रेस को एक इंटरव्यू दिया। या यूं कहें सम्बोधित किया। ब्रेकिंग खबर यह नहीं है कि उन्होंने क्या कहा। ब्रेकिंग खबर यह है कि, उन्होंने पहली बार प्रेस को इंटरव्यू दिया। सरकार बनने के बाद। प्रधानमंत्री जी, राष्ट्रीय मीडिया जिसमें सभी […]

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 आप कैसे कह सकते हैं, कि कोई विरोध न हो

आप कैसे कह सकते हैं, कि कोई विरोध न हो

केसे विरोध न हो… कैसे कोई विरोध न हो,विरोध करता हूँ आपका,आपकी राजनीति का, तो क्या आप टेढ़ी आंखों से देखेंगे मुझे? लेकिन क्यों क्या आप विरोध को खत्म कर देना चाहते है? क्या आप “विपक्ष” को खत्म कर देना चाहते हो? अगर विरोध ही न होगा तो फिर कैसे समाज मे “मार्क्स” पैदा होगा? […]

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 सिस्टम बदलने के लिये लगातार मेहनत की ज़रूरत है

सिस्टम बदलने के लिये लगातार मेहनत की ज़रूरत है

“लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है” इत्यादि-इत्यादि…. यह सब लोकतंत्र के विरोध की कमज़ोर दलीलें बनी हुई हैं। जब लोग लोकतंत्र के […]

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