ये भी तो अज़ादी ही है, कि किसे बाईट दी जाये और किसे नहीं

ये भी तो अज़ादी ही है, कि किसे बाईट दी जाये और किसे नहीं

दो दिनों से कई पोस्ट पढ़ चुका हूं जिसमें Shehla Rashid की इस बात पर आलोचना की जा रही है कि उसने Republic के पत्रकार को क्यों हड़काया। कुछ बातें कहने को हैं: ये जो ताज़ा रिपब्लिक है और जिसका डॉन पहले TIMES NOW में था, उसने कैसी रिपोर्टिंग और कैसी डिबेट की JNU को […]

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