ग़ज़ल – जाउंगा कहाँ ऐ दिल तुझको छोड़ कर तन्हा

ग़ज़ल – जाउंगा कहाँ ऐ दिल तुझको छोड़ कर तन्हा

जाउंगा कहाँ ऐ दिल तुझको छोड़ कर तन्हा कैसे मैं करूं बढ़ती उम्र में सफर तन्हा   भीड़ में या मेले में मैं रहा जहाँ भी हूँ  ढूंढती रही खुद को ये मिरी नज़र तन्हा   हम सफर था जो मेरा हमकदम था जो मेरा वो चले गया मुझको आज छोडकर तन्हा   कानाफूसी करते […]

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 कविता- बेटी से माँ तक का सफर

कविता- बेटी से माँ तक का सफर

बेफिक्री से फ़िक्र का सफर रोने से खामोश कराने का सफर बेसब्री से तहम्मुल का सफर पहले जो आँचल में छुप जाया करती थी आज किसी को आँचल में छुपा लेती है पहले जो ऊँगली जल जाने से घर सर पर उठा लेती थी आज हाथ जल जाने पर भी खाना बनाया करती है पहले […]

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