चरखे की डोर से संवार रहे लोगों की जिंदगी

चरखे की डोर से संवार रहे लोगों की जिंदगी

खादी के बारे में लगभग सभी जानते हैं कि, “खादी वस्त्र नहीं, विचार है”, इस सूत्रवाक्य के रचयिता महात्मा गांधी हैं और उन्होंने इसकी नींव 1916 में साबरमती आश्रम गुजरात  की थी. इस के बाद लोगों ने अंग्रेजों के परिधानों के बजाय बापू के चरखे को हाथों में उठाया और सूत से तैयार वस्त्र पहनने […]

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