सेना के बड़े बड़े पदों पर बैठे लोग कह रहे है कि सर्जिकल स्‍ट्राइक का राजनीतिकरण किया जा रहा है. 2016 सर्जिकल स्‍ट्राइक के समय उत्‍तरी सेना के कमांडर रहे लेफ्ट‍िनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुड्डा ने कहा कि स्‍ट्राइक का “ढिंढोरा” पीटने से मदद नहीं मिली ओर “सैन्‍य ऑपरेशंस का राजनीतिकरण” होना “ठीक नहीं”…….”चुनिंदा वीडियोज,फोटोग्राफ्स को लीक करके एक मिलिट्री ऑपरेशन को राजनीतिक चर्चा में बनाए रखने का प्रयास हुआ हैं” उनका मानना है कि अगर हमने चुपचाप (सर्जिकल स्‍ट्राइक) की होती तो ज्‍यादा अच्‍छा होता।”

दरअसल हो ये रहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक की बात करके पर एक व्यक्ति विशेष का महिमा मंडन किया जा रहा हैं. क्या पहले सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन अंजाम नही दिए गए जवाब है कि बिल्कुल दिए गए है, लेकिन किसी ने इस तरह से उसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश नही की.

इस तरह की बाते फैला कर असली बातों से ध्यान हटाया जाता है अभी दो दिन पहले की ही खबर है कि मोदी सरकार ने सेनाओं की लंबे समय से चली आ रही मिलिट्री सर्विस पे (एमएसपी)बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया है, सेना ने मांग की थी कि मासिक मिलिट्री सर्विस पे को 5500 रुपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए किया जाए. दरअसल एमएसपी की दो श्रेणियां हैं. एक अफसरों के लिए और दूसरी जवानों और जेसीओ के लिए, थलसेना जेसीओ के लिए ज्यादा एमएसपी की मांग करती रही है. उसकी दलील है कि वे राजपत्रित अधिकारी (ग्रुप बी) हैं और सेना की कमान एवं नियंत्रण ढांचे में अहम भूमिका निभाते हैं,पीटीआई की खबरबता रही है कि वित्त मंत्रालय के इस फैसले से थलसेना मुख्यालय में ‘बहुत रोष’है.

लेकिन आप देखिए कि इस तरह की खबरों को पूरी तरह से दबा दिया जाता है ओर सर्जिकल स्ट्राइक के बहाने बीजेपी 2019 के चुनावों में फिर एक बार राष्ट्रवाद का तड़का मारने को तैयार हो जाती है.