आज NIA की जांच का नतीजा आया है कि हादिया और शेफ्फीन जहाँ की शादी लव जिहाद नही थी. क्या हाई कोर्ट के उस जज को कुछ दंड दिया जाएगा जिसने हादिया की शादी को अवैध घोषित कर दिया था . क्या NIA के अधिकारियो से उनके काम को गलत ढंग से करने पर कुछ चार्ज लगेगा, ये वही NIA है जिसने सुप्रीम कोर्ट में कभी शेफ्फीन को ISIS का मेंबर बताया या कभी हादिया को मानसिक रोगी बता दिया था .

क्या उन मीडिया चैनल पे कुछ कार्यवाही होगी जो घण्टो हादिया के ऊपर लव जिहाद का कार्यक्रम चलाते थे और सऊदी अरब से लेकर सीरिया तक से इसे जोड़ देते थे .

इसी NIA की वजह से 6 महीने हादिया को हाउस अरेस्ट किया गया उसको भूखा रखा गया उसकी पिटाई करी गयी, धमकियां और गालिया की तो कोई गिनती ही नही है. न किसी से मिलने दिया गया उधर शेफ्फीन के पूरे परिवार को ज़िन्दगी भर जेल में डालने का स्क्रिप्ट तैयार करी गयी मैंने खुद पिछले साल काफी कोशिश करी सितंबर में लेकिन नही मिल सका.

मुझे याद है जिस रात में हादिया आई थी हम कुछ लोगो के साथ ठंड की रात में 12 बजे केरल हाउस में खड़े नारे लगा रहे थे. ताकि हादिया को ये न लगे कि दिल्ली में उसका कोई नही है अगले दिन सुबह जब कोर्ट रूम में हादिया का विश्वास देखा तो यकीन हो गया था, की आज कुछ होगा.उसके बावजूद NIA ने पूरी कोशिश करी कि हादिया कोर्ट में न बोल सके और दुनिया की कहानी सुनाई .

जब कपिल सिब्बल ने कहा कि आज वीमेन डे है और हादिया को बोलने देना चाहिए, तो NIA ने कहा कि हादिया मानसिक बीमार है. और ऐसे में वो अपने मारने वाले को ही अपना मालिक समझता है, और शेफ्फीन को वही समझ रही है. शेफ्फीन के बारे में बोला कि वो उसे अरब देश मे बेच देगा .

बहरहाल हादिया उस दिन बोली और नतीजा आपके सामने है, लेकिन इस जांच ने जो उनकी ज़िंदगी को जहन्नम बनाया उसकी ज़िम्मेदार NIA और लोअर कोर्ट और हाई कोर्ट हैं. उनका क्या होगा, कहीं निकल नही सकते, जा नही सकते, सुरक्षा की समस्या और 1 साल जिस प्रताड़ना से गुजरे उसका जवाब क्या कोर्ट के जजों से लिया जाएगा?

मुझे याद है उस दिन रात में कैसे घेरा बना कर सुप्रीम कोर्ट से शेफ्फीन को निकाला था कि कही कोई हमला न कर दे, उसके बाद से वो बाहर कितनी बार निकला ?

कुछ दिन पहले मैंने फ़ोन पे कहा कि दिल्ली घूमने जाओ, उन्होंने कहा डर लगता है घर से निकलने में. शेफ़ीन को अपनी फेसबुक ID बन्द करनी पड़ी फ़ोन नंबर बदलना पड़ा. जब तक NIA और हाइकोर्ट के जजों पर कार्यवाही नही होती हादिया का इंसाफ अधूरा है.

एक दो प्रोग्राम के लिए केरल आया हूँ , अगर वक़्त ने इजाज़त दी तो थ्रिसुर जा कर दोनों से मुलाक़ात करूंगा, और हाँ जब तक देश मे ज्यूडिशियल अकाउंटिबिलीटी की बात नही होगी ये सब ड्रामा चलता रहेगा, मुस्लिम दलित और आदिवासी किसी न किसी बहाने पीटे भी जाएंगे और मुजरिम भी वही माने जाएंगे.